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बाग़ी 2

बाग़ी 2

3.2 45053 रेटिंग्स

डायरेक्टर : अहमद खान

रिलीज़ डेट :

  • मूवी जॉकी रेटिंग्स 1.9/5
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प्लाट

फिल्म ‘बाग़ी’ ने सबको सरप्राइज़ करते हुए दर्शकों को बहुत एंटरटेन किया और इस फिल्म की शानदार कामयाबी के बाद ये ब्रांड एक बार फिर से बड़े बजट और पहले से भी ज़्यादा स्टाइलिश अवतार में वापस आ रहा है। टाइगर श्रॉफ ‘बाग़ी 2’ में भी लीड रोल में हैं और इस बार उनके साथ दिशा पटनी नज़र आएंगी। पिछली फिल्म में टाइगर के साथ नज़र आईं श्रद्धा कपूर इस बार फिल्म ...और देखें

निर्णय

“कहानी की फ़िल्म में एक्शन सीक्वेंस और मनोज वाजपेयी जैसे एक्टर ज़बरदस्ती ठूंसे गए हैं।”

बाग़ी 2 क्रेडिट और कास्ट

टाइगर श्रॉफ

क्रेडिट

बाग़ी 2 जनता के रिव्यू

टाइगर श्रॉफ की ऐब्स के अलावा फिल्म में देखने लायक कुछ भी नहीं है !

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रेटेड 1.5 / 5
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द्वारा Usha Shrivas (286002 डीएम पॉइंट्स) | ऑल यूज़र रिवीव्स

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रिव्यू बाग़ी 2 & डीएम पॉइंट्स*

जो सारे बने-बनाए नियम-कायदों को तोड़ दे और पूरे सिस्टम को झिंझोड़ के रख दे उसे कहते हैं बागी ! और टाइगर श्रॉफ अपनी फ़िल्म ‘बागी 2’ में इसी एक मन्त्र पर चल रहे हैं। बॉलीवुड में कदम रखने के बाद से ही टाइगर श्रॉफ को बहुत मेहनती एक्टर माना जाता है और लोगों को उनसे बहुत उम्मीदें हैं। ‘बाग़ी 2’ में टाइगर ने इन उम्मीदों को पूरा करने की अच्छी ‘कोशिश’ की है। इस फिल्म के लिए उन्होंने खुद को फिजिकली काफ़ी तैयार किया है और वो अपनी सभी फिल्मों से बहुत अलग नज़र आ रहे हैं।
लेकिन ! टाइगर से नज़र हटते ही आपको समझ आता है कि ‘बाग़ी 2’ में उनके अलावा और कुछ तो है ही नहीं, कहानी भी नहीं। फिल्म को देखते हुए ऐसा लगता है कि पहले टाइगर श्रॉफ को इस रोल के लिए पूरी तरह तैयार किया गया, फिर एक्शन और स्टंट प्लान किए गए, और फिर ये सोचा गया कि कहानी क्या रखी जाए।
टाइगर श्रॉफ यानी कैप्टेन रणवीर प्रताप सिंह एक आर्मी ऑफिसर हैं और 4 साल से देश की सीमा पर पोस्टेड हैं। एक दिन रणवीर को 4 साल पहले की उनकी एक्स नेहा यानी दिशा पटनी का फोन आता है। नेहा को रणवीर से मदद चाहिए और उनकी मदद करने के लिए 4 सालों से एक भी छुट्टी न लेने वाले कैप्टेन साहब, छुट्टी लेकर अपनी एक्स की हेल्प करने चल देते हैं। नेहा की बेटी किडनैप हो चुकी है और कोई उनकी मदद नहीं कर रहा। इसीलिए उन्होंने रणवीर को याद किया है। रणवीर आते हैं और नेहा की बेटी को खोजना शुरू करते हैं। लेकिन रणवीर की ये खोज इतनी सिंपल नहीं है, उन्हें बीच में ही रोकने के लिए करप्ट पुलिस, नेहा का पति और गोवा का ड्रग्स माफ़िया पूरी तरह तैयार है। रणवीर की ये खोज ही फिल्म की कहानी है। उन्हें बच्ची मिलती है या नहीं और बच्ची को खोजते हुए रास्ते में जो शॉकिंग सच्चाइयां मिलती हैं, वही फिल्म का सस्पेंस है।
फिल्म का स्क्रीनप्ले बहुत ढीला है, फ़्लैश-बैक्स के सहारे कहानी को मज़ेदार बनाने की कोशिश तो हुई, लेकिन पहले 40 मिनट में ही स्क्रीनप्ले राईटर्स के हाथ से फिल्म निकल चुकी थी। फिल्म में एक्शन सीन कहीं से भी शुरू हो जाते हैं और बिना किसी नतीजे के ख़त्म। एक ही पल में फिल्म सस्पेंस पकड़ने लगती है और अगले ही पल कोई गाना आ जाता है, जो कि बहुत डिस्टर्बिंग है।
एक्टिंग के मामले में भी फिल्म ठीक-ठाक ही है, लेकिन रणदीप हुडा और मनोज बाजपाई ने फिल्म बचाने के लिए पूरी जान लगा दी है। टाइगर श्रॉफ को एक चीज़ का क्रेडिट दिया जाना चाहिए कि उनकी पिछली फिल्मों के मुकाबले, इस बार वो एक्टिंग करते हुए ज़्यादा सहज लगे। फिल्म की फीमेल लीड दिशा पटनी ने अपने किरदार को अच्छा निभाया है। रणदीप हुडा इस फिल्म के सरप्राइज पैकेज हैं, अगर वो न होते तो शायद इस फिल्म को पूरे ढाई घंटे झेलना मुमकिन न हो पाता। प्रतीक बब्बर को शायद फिल्मों में वापिस नहीं आना चाहिए था। उन्हें कुछ और दिन ब्रेक की ज़रूरत है। दीपक डोबरियाल ने अपने रोल को अच्छा सम्भाला।
एक एक्शन फिल्म में गाने थोड़ा रिलीफ़ देने का काम करते हैं, लेकिन यहीं पर ये फिल्म सबसे ज़्यादा निराश करती है। आतिफ़ असलम और ज़ुबिन नौटियाल की खूबसूरत आवाजों को गानों में वेस्ट किया गया है। ये दोनों ही फ़िलहाल बॉलीवुड के सबसे अच्छे गायकों में से एक हैं, लेकिन लिरिक्स हल्के होने की वजह से हॉल से बाहर निकलने के बाद इस फिल्म का कोई भी गाना याद नहीं रहता।
इस फिल्म के डायरेक्टर अहमद खान बॉलीवुड के जाने माने कोरियोग्राफर हैं, लेकिन डायरेक्टर के तौर पर उनके स्किल्स उतने शानदार नहीं लगते। ‘बाग़ी 2’ से पहले अहमद ने 2007 में फिल्म ‘फूल एंड फाइनल’ डायरेक्ट की थी, इस मूवी का हश्र बॉक्स-ऑफिस पर बहुत ही बुरा रहा था। ‘बाग़ी 2’ में अहमद ने एक बार फिर डायरेक्शन संभाला है, लेकिन बहुत से हिस्सों पर ये फिल्म ‘डायरेक्शन-लेस’ लगती है। रणदीप हुडा, मनोज बाजपाई और प्रतीक बब्बर को उन्होंने वेस्ट कर दिया है। इन तीनों के रोल बहुत बेहतरीन हो सकते थे, लेकिन ये टैलेंटेड एक्टर्स खासकर मनोज बाजपाई इस फिल्म में क्या कर रहे थे ये समझ से बाहर है।
कुल मिलाकर ‘बाग़ी 2’ को एक एवरेज फिल्म कहा जा सकता है। फिल्म कई छोटे-छोटे टुकड़ों में बहुत अच्छी लगेगी लेकिन जैसे ही आपको इंटरेस्ट आना शुरू होगा, कुछ न कुछ ऊटपटांग हो जाएगा। एक्शन सीन्स और स्टंट्स में टाइगर श्रॉफ की मेहनत को देखने के लिए इस फिल्म को एक बार देखा जा सकता है। फिल्म में गिने-चुने ही सही, लेकिन लाइट सीन्स भी हैं। इन हिस्सों में एक्टर्स की कॉमिक टाइमिंग ज़बरदस्त है। दिमाग चलाने वालों के लिए ये लिए फिल्म नहीं है। कॉलेज स्टूडेंट्स और 3 घंटे बस मज़े के लिए फिल्म देखने वालों को ये फिल्म पसंद आएगी।

  • Storyline
  • Direction
  • Acting
  • Cinematography
  • Music
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