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कालाकाण्डी

कालाकाण्डी

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रिलीज़ डेट :

  • मूवी जॉकी रेटिंग्स 1.6/5
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प्लाट

कालाकांडी एक डार्क कॉमेडी है, जिसमें मृत्यु और कर्मा का ज़िक्र किया गया है | इस फिल्म में सैफ़ अली खान मुख्य किरदार निभा रहे हैं | फिल्म कालाकांडी को अक्षत वर्मा ने निर्देशित किया है | समीर उद्दीन ने फिल्म के लिए अपना संगीत दिया है | रोहित खट्टर और अशी दुआ सारा फिल्म के निर्माता हैं | फिल्म कालाकांडी 8 नवंबर 2017 को रिलीज़ है |

निर्णय

“जितना मज़ा ये फिल्म आपको देना चाहती है आपको उतना मज़ा नहीं आएगा !”

कालाकाण्डी जनता के रिव्यू

सैफ की फिल्म ‘कालाकांडी’ आपको हंसाएगी कम और रुलाएगी ज़्यादा !

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रेटेड 1.5 / 5
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द्वारा Usha Shrivas (334902 डीएम पॉइंट्स) | ऑल यूज़र रिवीव्स

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रिव्यू कालाकाण्डी & डीएम पॉइंट्स*

साल की शुरुआत के बाद ये उम्मीद की जा रही थी कि इस साल हमें कुछ बेहतरीन फिल्में देखने को मिलेंगी। लेकिन सैफ अली खान की फिल्म 'कालाकांडी' ने हमारी सभी उम्मीदों पर पानी सा फेर दिया। इस फिल्म में सैफ के साथ दीपक डोबरियाल, विजय राज, कुणाल रॉय कपूर, अक्षय ओबेरॉय, ईशा तलवार जैसे कलाकार भी शामिल हैं। फिल्म को 'डेली बेली' जैसी फिल्मों की कहानी लिख चुके अक्षय वर्मा ने डायरेक्ट किया है।

फिल्म की कहानी बहुत सिंपल है लेकिन अंत तक आपको समझ नहीं आयेगी। शुरुआत होती हैं जहां सैफ को पता चलता है कि उन्हें कैंसर है और वो ज़्यादा दिन के मेहमान नहीं है। इसके बाद सैफ हर वो काम करना चाहते हैं जो उन्होंने पहले कभी नहीं किया। जिसमें वो आपको अजीब हरकतों के अलावा कुछ करते नहीं दिखेंगे। वो एक अलग ही दुनिया को जीने लगते हैं। जो आपको बोर करती है। इसके अलावा फिल्म के बाकि किरदारों की कहानी भी अलग-अलग चलती है। किसी को पैसों की ज़रूरत होती है, किसी के हाथों एक्सीडेंट हो जाता है तो कोई शादी से भागना चाहता है। लेकिन ये सभी किरदार न ही आपस में और न दर्शकों के साथ जुड़ ही पाते हैं।

फिल्म देख कर आप आपना सिर पकड़ लेंगे और सोचोगे कि डायरेक्टर अक्षय वर्मा ने ये फिल्म क्या सोच कर बनाई है। फिल्म देख कर आप भी कहेंगे कि अक्षय वर्मा डायरेक्शन के मामले में थोड़े नहीं बहुत कच्चे हैं।

एक्टिंग की बात की जाए तो पूरी फिल्म में सफ़ेद शर्ट में नज़र आये सैफ अली खान ओवर एक्टिंग करते ज़्यादा दिखे हैं। उन्हें अजीब हरकत करते देख आपको हंसी कम और गुस्सा ज़्यादा आएगा। विजय राज और दीपक डोबरियाल के बीच की बातचीत बेशक थोड़ी मज़ेदार लगेगी। लेकिन जबरदस्ती गुसाई गालियां आपको पसंद नहीं आएंगी। इसके अलावा बाकि किरदारों को कोई खास काम नहीं दिया गया।

फिल्म में कभी भी कुछ भी दिखाया गया है, इंग्लिश का अधिक प्रोयोग है जिसे देख आप समझ सकते हैं कि ये फिल्म किसी एक वर्ग को ध्यान में रख कर ही बनाई गई है। फिल्म में शुरुआत से लेकर अंत तक आप बस कुछ अच्छा होने का इंतज़ार करते रहेंगे लेकिन अफ़सोस आपने आज से पहले इससे बेकार एंड किसी फिल्म का नहीं देखा होगा।

ट्रेलर देखने के बाद फिल्म से काफी उम्मीदें थीं लेकिन हमें बस निराशा ही हाथ लगी। कुछ नया और अलग देखने की उम्मीद इस फिल्म से लगाना गलत है। लेकिन फिर भी अगर आप सैफ और दीपक डोबरियाल का कॉमिक अंदाज़ देखना चाहते हैं तो फिल्म एक बार देख सकते हैं।

वैसे इस हफ्ते 'कालाकांडी' के साथ अनुराग कश्यप की फिल्म 'मुक्काबाज़' भी रिलीज़ हुई हैं। दोनों फिल्मों के बीच हुई टक्कर का नतीजा जानने के लिए आपको हफ्ते भर का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। 'मुक्काबाज़' 'कालाकांडी' पर बहुत भारी पड़ी है।

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