परमाणु : द स्टोरी ऑफ़ पोखरण

परमाणु : द स्टोरी ऑफ़ पोखरण

3.2 35502 रेटिंग्स

डायरेक्टर : Abhishek Sharma

रिलीज़ डेट :

  • मूवी जॉकी रेटिंग्स 2.7/5
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प्लाट

परमाणु: द स्टोरी ऑफ पोखरण को अभिषेक शर्मा ने डायरेक्ट किया है जिसमें मुख्य भूमिका में जॉन अब्राहम हैं। फ़िल्म में जॉन के साथ अभिनेत्री डायना पेंटी जोड़ी बनाती नज़र आएँगी ! फ़िल्म में सचिन जिगर का संगीत है और फ़िल्म 23 फ़रवरी को सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जायेगी !

निर्णय

“देश के माहौल में चल रही देशभक्ति की हवा को कैश करती दिखती है ये फिल्म !”

परमाणु : द स्टोरी ऑफ़ पोखरण क्रेडिट और कास्ट

जॉन अब्राहम

क्रेडिट

कास्ट (कास्ट (क्रेडिट ऑर्डर में))

परमाणु : द स्टोरी ऑफ़ पोखरण जनता के रिव्यू

जॉन अब्राहम की इस फिल्म में देशभक्ति तो है, मगर ईमानदारी नहीं !

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रेटेड 1.5 / 5
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द्वारा Subodh Mishra (25646 डीएम पॉइंट्स) | ऑल यूज़र रिवीव्स

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रिव्यू परमाणु : द स्टोरी ऑफ़ पोखरण & कमाए 20 एक्सचेंज DM पॉइंट्स और उन्हें बदले कैश में *

भारत के इतिहास में 11 मई, एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण दिन है। इसी दिन 1998 में भारत ने पहली बार परमाणु बम टेस्ट करने में कामयाबी हासिल की थी और भारत एक न्यूक्लियर पॉवर बन गया था। जॉन अब्राहम की फिल्म ‘परमाणु: द स्टोरी ऑफ़ पोखरण’ देश की उपलब्धि को सेलिब्रेट करती है। पोखरण, वो जगह है जहां भारत अपने न्यूक्लियर टेस्ट करता है। इस जगह पर भारत ने पहला टेस्ट किन हालातों में किया और इसे करने में कितनी मुश्किलें आईं, ये फिल्म इसी की कहानी है।
‘परमाणु: द स्टोरी ऑफ़ पोखरण’ में जॉन अब्राहम मुख्य भूमिका में हैं और उनके किरदार का नाम है ‘अश्वत रैना।’ अश्वत के पिता आर्मी ऑफिसर थे और वो खुद एक आईएएस ऑफिसर है, जो मिनिस्ट्री के लिए काम करता है। अश्वत के पास भारत के न्यूक्लियर मिशन के लिए एक आईडिया है, जिसे वो सरकार के एक मंत्री के सामने रखता है। ये मंत्री, अश्वत के प्लान को अपना प्लान बताकर प्रधानमंत्री के आगे रखता है और वाहवाही बटोर लेता है। लेकिन भारत के न्यूक्लियर टेस्ट की तैयारी के बारे में पता लगते ही, पूरी दुनिया से भारत को आलोचना झेलनी पड़ती है। दुनियाभर में भारत का नाम ख़राब होता है और इसका दोष अश्वत के सर पर डालकर, उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है। अश्वत अपने परिवार के साथ मसूरी चला जाता है और सिविल सर्विसेज़ की तैयारी करते बच्चों को कोचिंग देने लगता है। 3 साल बाद संसद में सरकार बदलती है और एक बार फिर से न्यूक्लियर टेस्ट्स पर ध्यान दिया जाता है। इस वक़्त प्रधानमंत्री के मुख्य सेक्रेटरी हिमांशु शुक्ला (बोमन ईरानी) अश्वत को खोज कर निकालते हैं और उसके प्लान के बारे में पूछताछ करते हैं।
अश्वत के प्लान से हिमांशु शुक्ला बहुत प्रभावित होते हैं और उसे भारत ने न्यूक्लियर प्रोग्राम की कमान सौंपते हैं। अश्वत एक टीम तैयार करता है जिसमें फिल्म की एक्ट्रेस डायना पेंटी भी हैं, 6 परमाणु बमों का सफलतापूर्वक परिक्षण करना ही इस टीम का लक्ष्य है। इस मिशन में सबसे बड़ा खतरा है अमेरिका की सैटेलाईट, जो पिछली नाकामयाबी के बाद से पोखरण पर कड़ी नज़र रखे हुए है। इन सब मुश्किलों का सामना करते हुए और अपनी पत्नी के विरोध से बचकर अश्वत, देश के इस मिशन को किस तरह कामयाब बनाता है यही फिल्म की कहानी है।
फिल्म की कहानी देश से जुड़ी है इसलिए इसे देखने में उत्सुकता तो बढ़ती है। लेकिन ये कहना गलत न होगा कि असल इतिहास से ‘प्रेरित’ इस फिल्म में काल्पनिक घटनाएं ज्यादा हैं। फिल्म ऐसा फील देती है जैसे असली पोखरण टेस्ट पूरी तरह बस एक ही इन्सान ने संभाला था, जिसका किरदार जॉन निभा रहे हैं। फिल्म में बहुत सारी जगह फैक्ट्स को भूलकर, कहानी पूरी तरह कल्पना पर आधारित लगती है।
अभिषेक शर्मा का डायरेक्शन ठीक-ठाक है, लेकिन इसे बहुत बेहतरीन नहीं कहा जा सकता। अभिषेक चाहते तो फैक्ट्स और असल इतिहास की तरफ ध्यान देकर फिल्म को और भी ज़्यादा प्रभावी बना सकते थे।
फिल्म के गाने अच्छे हैं, लेकिन उनकी टाइमिंग बहुत गलत है। ‘परमाणु: द स्टोरी ऑफ़ पोखरण’ के गाने फिल्म की जगह, अलग से एक एल्बम की तरह सुनने में ज़्यादा मज़ा देंगे।
एक्टिंग के मामले में भी फिल्म को बहुत अच्छा नहीं कहा जा सकता। जॉन की परफॉरमेंस बहुत जगह कन्फयूजिंग लगती है। उनके एक्सप्रेशन पूरी फिल्म में बिलकुल एक जैसे लगते हैं। बोमन ईरानी हर बार के तरह अपनी जगह फ़िट हैं और डायना पेंटी का को बहुत कुछ करने को नहीं मिला है।
कुल मिलाकर, आजकल माहौल में घुली देशभक्ति को ये फिल्म शायद अच्छे से कैश करने में कामयाब हो जाए, लेकिन फिल्म को देखना ही चाहिए ऐसा कोई खास कारण नहीं है।

  • Storyline
  • Direction
  • Acting
  • Cinematography
  • Music