DA Image
सूरमा

सूरमा

3.3 34136 रेटिंग्स

डायरेक्टर : शाद अली

रिलीज़ डेट :

  • मूवी जॉकी रेटिंग्स 3.2/5
  • रेट करें
  • रिव्यू लिखें

प्लाट

भारत के इंटरनेशनल हॉकी प्लेयर संदीप सिंह की जिंदगी पर बनी 'सूरमा', तोड़कर रख देने वाली मुश्किलों से लड़कर संदीप की वापसी की कहानी है । अपने करियर के शिखर पर संदीप को, एक आर पी एफ़ जवान की गलती से चली गोली ने घायल कर दिया था और उनके शरीर का निचला हिस्सा पैरालाईज़ हो गया था । इसके बाद संदीप की हॉकी में वापसी, खेलों की दुनिया के लिए एक...और देखें

निर्णय

“ फिल्म की कहानी,प्यार और स्पोर्ट का मिश्रण है जिसे बख़ूबी से दिखाया गया है। ”

सूरमा क्रेडिट और कास्ट

Taapsee Pannu

क्रेडिट

कास्ट (क्रेडिट ऑर्डर में)

सूरमा जनता के रिव्यू

फिल्म 'सूरमा' में हॉकी प्लेयर संदीप सिंह की कहानी आपके रोंगटे खड़े कर देगी !

|
रेटेड 3.5 / 5
|
द्वारा Subodh Mishra (344810 डीएम पॉइंट्स) | ऑल यूज़र रिवीव्स

रिव्यू लिखें

रिव्यू सूरमा & डीएम पॉइंट्स*

‘दिल पत्थर हो जाएगा, या पत्थर का दिल धड़केगा, ऐसी इक चट्टान से मैंने सर टकराया है’, दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सूरमा’ ऐसी ही फिल्म है, जिसे देखते हुए आपका दिल बेतरह धड़कता है। भारतीय हॉकी प्लेयर संदीप सिंह की बायोपिक ‘सूरमा’ में पत्थर का दिल धड़काने का पूरा दम है।
संदीप भारत के बेस्ट हॉकी प्लेयर्स में से एक हैं और हॉकी का ड्रैग फ्लिक शॉट इतना बेहतरीन मारते हैं कि उन्हें फ़्लिकर सिंह’ का नाम दिया गया है। अर्जुन अवार्ड से नवाजे गए संदीप ने 145 किमी/घंटा की रफ़्तार से एक फ्लिक मारा था, जो आजतक दुनिया का सबसे तेज़ फ्लिक है। दिल्ली-कालका शताब्दी में सफ़र करने के दौरान एक आर पी एफ़ जवान के बन्दूक की, गलती से चली गोली से संदीप घायल हो गए थे और कोमा में चले गए थे।
संदीप जब कोमा से बाहर आए तो उनके शरीर का निचला हिस्सा पैरालाईज़ हो चुका था। डॉक्टरों ने ये काहा कि शायद ही संदीप कभी अपने पैरों पर खड़े हो पाएं, हॉकी खेलना तो बहु तदूर की बात है। लेकिन संदीप ने हार नहीं मानी, वो न सिर्फ व्हीलचेयर से उठ खड़े हुए बल्कि वो दोबारा हॉकी में लौटे और ‘फ़्लिकर किंग’ बने।
‘सूरमा’ की शुरुआत होती है, पंजाब के क़स्बे शाहाबाद से जहां एक बच्चा, खेत में बने मचान पर चढ़कर एक टेढ़ी लकड़ी से पत्थर मार कर खेत में बैठी चिड़ियां उड़ा रहा है। यही बच्चा बड़ा होकर दिलजीत दोसांझ बनता है, जो इस फिल्म में भारत के हॉकी प्लेयर और ‘फ़्लिकर सिंह’ कहे जाने वाले संदीप सिंह का किरदार निभा रहे हैं। संदीप की इस कहानी की नैरेटर या कथाकार हैं प्रीतो उर्फ़ हरप्रीत। हरप्रीत खुद एक हॉकी प्लेयर हैं, जिसे प्रैक्टिस पर देखकर संदीप को उनसे प्यार होने लगता है और प्रीतो ही आगे चलकर उनके हॉकी खेलने की वजह बनती हैं।
दिलजीत दोसांझ की एक्टिंग बहुत सच्ची है, उन्हें पंजाब से होने का भी काफी फ़ायदा मिला। दिलजीत को पंजाब की भाषा और एक पंजाबी लड़के की बॉडी-लैंग्वेज की बारीकियां पकड़ने में ज़्यादा मेहनत नहीं लगी होगी। लेकिन एक हॉकी प्लेयर के किरदार में ढलने के लिए दिलजीत ने जो मेहनत की है वो साफ़ नज़र आती है। गोली लगने के बाद वाले सीन्स में दिलजीत की एक्टिंग बहुत शानदार है। एक टॉप हॉकी खिलाड़ी को पैरालिसिस होने पर कैसा दुःख हुआ होगा और उसपर क्या बीती होगी, इसे दिलजीत ने बहुत बेहतरीन तरीके से स्क्रीन पर जिया है।
इस परफॉरमेंस के लिए दिलजीत की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है। तापसी पन्नू ने प्रीतो का किरदार निभाया है, वो स्क्रीन पर कम दिखती हैं। लेकिन जब भी दिखती हैं, उनकी परफॉरमेंस आपको बांध लेती है। प्रीतो का किरदार बहुत दिलचस्प है और संदीप को ‘फ़्लिकर सिंह’ बनाने के पीछे उनकी भूमिका बहुत खूबसूरत है। संदीप को वापिस उनके पैरों पर खड़ा करने के लिए प्रीतो ने अपना इंटरनेशनल हॉकी करियर भी दांव पर लगा दिया।
संदीप के बड़े भाई के रोल में अंगद बेदी की परफॉरमेंस भी बहुत दमदार है और स्क्रीन पर दोनों भाइयों की बॉन्डिंग देखकर आपको बहुत अच्छा लगेगा। इन दोनों के पिता के रोल में सतीश कौशिक बहुत नैचुरल और बेहतरीन नज़र आते हैं। हॉकी कोच के रूप में बिजय राज मजेदार हैं और उनके डायलॉग सीटी मारने लायक हैं।
‘सूरमा’ के गाने बहुत खूबसूरत हैं और पहले ही पॉपुलर हो चुके हैं। बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन लिरिक्स राइटर कहे जाने वाले गुलज़ार ने ‘सूरमा’ के गाने लिखे हैं और गानों को कम्पोज़ किया है ज़बरदस्त म्यूजिक डायरेक्टर्स शंकर-एहसान-लॉय ने। गानों की खासियत ये हैं कि वो फिल्म की स्पीड को तोड़ते नहीं बल्कि कहानी को और भी खूबसूरत बनाते हैं।
‘सूरमा’ के डायरेक्टर शाद अली की पिछली फिल्म ‘ओके जानू’ को लोगों ने पसंद नहीं किया था, लेकिन ये फिल्म सबूत है कि वो बहुत अच्छी फ़िल्में बना सकते हैं। हालांकि फिल्म की कहानी दमदार होने के बावजूद कहीं-कहीं पर ऐसा लगता है कि कुछ तो कमी है। ऐसा शायद इसलिए है कि शाद अली ने फिल्म की कहानी को थोड़ा सा पंजाब के दर्शकों के हिसाब से ढालने की कोशिश की है।
कुल मिलाकर, एक हॉकी प्लेयर के संघर्ष की बेहतरीन कहानी और एक्टर्स की बेहतरीन परफॉरमेंस ‘सूरमा’ की सबसे बड़ी खासियत है। दर्शकों का दिल जीतने में ‘सूरमा’ यकीनन कामयाब होगी।

  • Storyline
  • Direction
  • Acting
  • Cinematography
  • Music
CoverPoster - SoormaPoster - SoormaPoster - SoormaPoster - SoormaPoster - SoormaPoster - SoormaPoster - SoormaPoster - Soorma