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टॉयलेट : एक प्रेम कथा

टॉयलेट : एक प्रेम कथा

3.6 14004 रेटिंग्स

डायरेक्टर : Sanjay Narayan Singh

रिलीज़ डेट :

  • मूवी जॉकी रेटिंग्स 3.6/5
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प्लाट

यह एक प्रेम कथा है और एक सामाजिक रूप से संचालित नाटक है, जिसमें अक्षय कुमार ने भूमिका निभाई है। फिल्म में नायिका के रूप में भूमि पेडनेकर हैं और फिल्म 'दम लागा के हाईशा' की सराहना के बाद यह उनकी दूसरी फिल्म है। यह फिल्म मुख्य रूप से 'स्वच्छ भारत की सरकार की पहल पर आधारित है और देश के दूरस्थ क्षेत्रों में शौचालय बनाने की आवश्यकता के बारे मे...और देखें

निर्णय

“फिल्म में एक सामाजिक मुद्दे को काफी मसाले के साथ सुलझती है और मनोरंजन भी करती हैं। फिल्म अच्छी है। ”

टॉयलेट : एक प्रेम कथा क्रेडिट और कास्ट

अक्षय कुमार

क्रेडिट

कास्ट (क्रेडिट ऑर्डर में)

टॉयलेट : एक प्रेम कथा जनता के रिव्यू

कुछ अलग देखना है तो ‘टॉयलेट : एक प्रेम कथा’ देख लीजिये !

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रेटेड 4.0 / 5
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द्वारा Usha Shrivas (735402 डीएम पॉइंट्स) | ऑल यूज़र रिवीव्स

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रिव्यू टॉयलेट : एक प्रेम कथा & डीएम पॉइंट्स*

अक्षय कुमार की फिल्म 'टॉयलेट: एक प्रेम कथा' आखिरकार रिलीज़ हो गई है। फिल्म असल जिंदगी पर आधारित एक सामाजिक मुद्दा उठाती है, जिसे आज तक फिल्मों के माध्यम से नहीं दिखाया गया। फिल्म में अक्षय कुमार और भूमि पेडनेकर मुख्य किरदार में हैं और इसे श्री नारायण सिंह ने डायरेक्ट किया है। श्री नारायण सिंह इससे पहले एमएस धोनी, स्पेशल छब्बीस, बेबी और अ वेडनेसडे जैसी फिल्मों को एडिट कर चुके हैं।

अगर फिल्म की बात करें तो ये केशव यानी अक्षय कुमार और जया यानी भूमि पेडनेकर की अनोखी प्रेम कहानी के इर्द-गिर्द घुमती है। केशव मांगलिक है, जिस वजह से उनकी पहली शादी मल्लिका से हो जाती है। रुकिए, मल्लिका कोई फिल्म एक्ट्रेस नहीं बल्कि एक भैंस है। बाद में केशव की जया से ट्रेन में मुलाकात होती है और उन्हें जया से पहली नज़र में प्यार हो जाता है। लाख कोशिशों के बाद दोनों की शादी हो जाती है और इसी के बाद शुरू होती है असली कहानी। शादी के बाद जया को पता चलता है कि उसके घर में टॉयलेट नहीं है और उसे भी बाकि महिलाओं की तरह सुबह लोटा पार्टी में शौच के लिए जाना होगा। जिससे परेशान होकर जया घर छोड़ कर चली जाती है। अब अपनी बीवी को वापस पाने के लिए केशव किस हद तक जायेगा ये देखने वाली बात है।

फिल्म का डायरेक्शन, सिनेमाटोग्राफी उम्दा है। मथुरा के एक गाँव को काफी अच्छे से दर्शाया गया है। गाँव के गोबर के उपलों से लेकर तंग गली और टूटी-फूटी सड़के आपको अपने गाँव की याद दिलाएगी।

एक्टिंग की बात की जाये तो कलाकारों में कमी निकालना मुश्किल है। अक्षय कुमार अपनी पिछली कुछ फिल्मों की तरह इसमें भी कमाल करते नज़र आ रहे हैं। बेहतरीन डायलॉग्स उनके इस किरदार को और निखार रहे हैं। भूमि पेडनेकर की ये दूसरी ही फिल्म है और उन्होंने अपनी पिछली फिल्म की तरह इस फिल्म में बेहतरीन काम किया है। मथुराई भाषा का एक्सेंट उन पर जच रहा है। जो बात आपको खटकती है वो ये कि गाँव की टॉपर लड़की को इंग्लिश के बेसिक शब्द ठीक से नहीं बोलने आ रहे। शायद डायरेक्टर ने इस बात कर ध्यान नहीं दिया। अनुपम खेर कुछ ही सीन्स में नज़र आये हैं, लेकिन जितनी बार दिखे कमाल कर गये। उनका सनी लियोनी के लिए प्रेम और जबरदस्त इंग्लिश उनके किरदार पर अच्छा लग रहा है। दिव्येंदु शर्मा और सुधीर पाण्डेय अपनी दमदार एक्टिंग से आपका दिल जीत लेंगे।

फिल्म से जितनी उम्मीदें थी ये उससे ज़्यादा अच्छी है। कहानी, एक्टिंग, डायरेक्शन, सिनेमाटोग्राफी सब बेहतरीन है। लेकिन म्यूजिक कुछ ख़ास नहीं है। बस फिल्म में कहीं-कहीं पोलिटिकल एंगल आता है, जो इसकी सबसे कमजोर कड़ी है। पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर नोटबंदी तक के मुद्दे को उठाया गया है, जो शायद नहीं होना चाहिए था। फिल्म अच्छी है परिवार संग जाइये और कम से कम एक बार तो ज़रूर देख लीजिये।

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