ऑल यूज़र रिवीव्स ऑफ़ 102 नॉट आउट

  • उम्र से ज़्यादा ज़िन्दगी कैसे जीनी चाहिए, ये इस फ़िल्म से सीखा जा सकता है !

    Subodh Mishra (25646 डीएम पॉइंट्स)

    रेटेड  
    3.0
    देसीमार्टीनी | अपडेट - May 03, 2018 23:42 PM IST
    3.0डीएम (46293 रेटिंग्स )

    निर्णय - ये फ़िल्म बताती है कि उम्र के नंबर से ज़्यादा ज़िन्दगी जीने का जज़्बा होना चाहिए... खुशहाल ज़िन्दगी जीने के खूबसूरत फॉर्मूले के लिए ये फ़िल्म ज़रूर देखी जानी चाहिए !

    102 नॉट आउटरिलीज़ डेट : May 04, 2018



    ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत हो सकती है ? इस सवाल के जवाब में बहुत सारी कविताएं, नॉवल और फिलोसॉफी लिखी जा चुकी है। लेकिन इस सवाल का बहुत ही सुंदर जवाब देती है फ़िल्म ‘102 नॉट आउट।’
    ज़िन्दगी उन बाप-बेटे के रिश्ते सी खूबसूरत है, जिस बाप की उम्र 102 साल है और बेटे की 75 साल। उम्र की सेंचुरी पर कर चुका एक बाप अपने बेटे से कई गुना जवान है, ये बाप ‘मरने के सख्त खिलाफ’ है। ऐसा नहीं है कि इन दोनों की ज़िंदगी मे सबकुछ खूबसूरत ही है, दोनों ने अपने-अपने हिस्से के दुख भी देखे हैं। आखिर इतनी लंबी उम्र जीने में आज़मी को दुख भी तो बहुत सारे देखने पड़ते हैं न !
    इन दुखों ने बेटे यानी ऋषि कपूर को ज़िन्दगी से थोड़ा उदास कर दिया है। लेकिन 102 साल के बाप यानी अमिताभ बच्चन ने यहीं पर ज़िन्दगी का असली मतलब बताया है। ज़िन्दगी हमें वैसी ही दिखती है, जिस चश्मे से हम उसे देखते हैं।
    ‘102 नॉट आउट’ की कहानी बस इतनी है कि ऋषि कपूर का बेटा सालों पहले अमेरिका जा बसा था। ऋषि को आज भी उसका इंतजार है और उसके इंतज़ार में वो ज़िन्दगी की रफ्तार से कट गए हैं और ठहर गए हैं। उनके पिता बने अमिताभ, अपने बेटे को एक बार फिर बचपन की तरह उंगली पकड़कर, ज़िन्दगी के साथ चलना सिखाना चाहते हैं। उनका कहना साफ़ और सीधा है- ‘जब औलाद नालायक निकल जाए, तो उसे भूल जाना चाहिए। बस उसका बचपन याद रखना चाहिए…’
    ये ज़िन्दगी की एक बहुत बड़ी सीख है और ये सीख वही दे सकता है, जिसने उम्र से ज़्यादा ज़िन्दगी जी हो। ये सीख एक 102 साल का जवान आदमी ही दे सकता है, जो अपने 75 साल के बेटे को बूढ़ा कहता हो। अपने बेटे को फिर से जवान करने के लिए अमिताभ उसके आगे कुछ शर्तें रखते हैं। शर्त न मानने पर वो ऋषि को वृद्धाश्रम भेजने की धमकी देते हैं। धमकी के डर में आ कर ऋषि शर्तें तो मानते हैं, लेकिन जवान होते हैं या नहीं… और अपने बेटे के इंतज़ार में आई उदासी छोड़ते हैं या नहीं, यही फ़िल्म की कहानी है।
    एक्टिंग के मामले में अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर के बारे में बस एक बात कही जा सकती है कि ये दोनों ही कलाकार उम्र के हर बीतते साल के साथ और भी बेहतर होते जा रहे हैं। इन दोनों ही अभिनेताओं ने अपनी उम्र का सबसे बड़ा हिस्सा स्क्रीन पर बिताया है, मगर जितनी बार ये स्क्रीन पर आते हैं ऑडियंस का दिल चुरा ले जाते हैं।
    सपोर्टिंग कास्ट के नाम पर इस फ़िल्म में बस एक नाम है- जिमित त्रिवेदी। धीरू के किरदार में जिमित अपनी परफेक्ट टाइमिंग के लिए आपको याद रहेंगे। अमिताभ और ऋषि जैसे दिग्गजों के सामने भी वो टिकते हैं और गायब नहीं होते।
    ‘102 नॉट आउट’ के डायरेक्टर उमेश शुक्ला ने फ़िल्म को बहुत अच्छा संभाला है। परेश रावल और अक्षय कुमार को लेकर उमेश ने फ़िल्म ‘OMG: ओह माय गॉड’ बनाई थी। मेसेज देती फिल्में बनाने में उमेश बहुत उस्ताद क़िस्म के डायरेक्टर हैं और यहां भी उन्होंने अपना हुनर एक बार फिर दिखाया।
    संगीत के मामले में फ़िल्म को अव्वल नंबर मिलने चाहिए। ‘102 नॉट आउट’ के गाने पहले ही अच्छे-खासे पॉपुलर हो चुके हैं। हालांकि एल्बम में जो गाने हैं, वो सभी फ़िल्म में नहीं हैं, लेकिन सोनू निगम का गाया गाना ‘कुल्फ़ी’, फ़िल्म के मैसेज को और मूड को बहुत अच्छे से सामने रखता है।
    फ़िल्म में छोटी सी कमियां भी हैं। ‘102 नॉट आउट’ थोड़ी सी असलियत से दूर जाती लगती है। 102 साल के आदमी को ज़रूरत से थोड़ा ज़्यादा फ़िट दिखा दिया गया है। फ़िल्म का क्लाइमेक्स थोड़ा ज़्यादा ड्रामेटिक हो जाता है। किसी किरदार के मैसेज को ज़रूरी दिखाने के लिए उसे जानलेवा बीमारी से पीड़ित दिखाना बहुत पुरानी थ्योरी है। उमेश शुक्ला अपनी खूबसूरत कहानी को इस थ्योरी से दूर रखते तो कुछ और नया निकलकर आता। लेकिन फ़िल्म तो फ़िल्म है और जब मेसेज अच्छा हो तो टेक्निकल चीजों को थोड़ा किनारे रखकर फ़िल्म देख लेनी चाहिए।

और ऑडियंस रिव्यूज़

  • Subodh Mishra

    Subodh Mishra

    6 रिव्यू
    रेटेड 3.0मई 03, 2018

    उम्र से ज़्यादा ज़िन्दगी कैसे जीनी चाहिए, ये इस फ़िल्म से सीखा जा सकता है !

    ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत हो सकती है ? इस सवाल के जवाब में बहुत सारी कविताएं, नॉवल और फिलोसॉफी लिखी जा चुकी है। लेकिन इस सवाल का बहुत ही सुंदर जवाब देती...और पढ़ें