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ऑल यूज़र रिवीव्स ऑफ़ शेफ (बॉलीवुड)

  • रिव्यू: रिश्तों को सहेजने के साथ ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा सीखाती है ये फ़िल्म!

    Surabhi Shukla (1260 डीएम पॉइंट्स)

    रेटेड  
    3.0
    देसीमार्टीनी | अपडेट - October 06, 2017 00:27 AM IST
    3.2डीएम (17854 रेटिंग्स )

    निर्णय - निर्णय: खाने पीने के शौक़ीन हैं तो इस फ़िल्म का प्रस्तुतीकरण आपको पसंद आएगा!

    शेफ (बॉलीवुड)ट्रेलर देखें रिलीज़ डेट : October 06, 2017



    दोनों पहली बार साथ में काम कर रहे हैं। यह फिल्म 2014 में इसी नाम से आई अमेरिकन फिल्म की आधिकारिक रीमेक है। फिल्म में लीड रोल सैफ अली खान और पद्मप्रिया जानकीरमन ने निभाया है। दोनों पहली बार साथ में काम कर रहे हैं। वहीं स्वर कांबले ने सैफ के बेटे का किरदारा निभाया है। फ़िल्म में आपको लजीज़ खाने के साथ बाप बेटे के भावनात्मक रिश्ते की कहानी देखने को मिलेगी। एक ऐसा व्यक्ति जो एक मशहूर शेफ है अपने बेटे को जिंदगी का पाठ पढ़ाता है। ये आपको न रुलायेगी न भावनाओं से सराबोर करेगी मगर कुछ ऐसे आपके दिल को छू जायेगी और ये बताएगी की ज़िन्दगी में रिश्तों की क्या एहमियत होती है ।

    फ़िल्म बाप बेटे के रिश्ते को बड़ी खूबसूरती से झलकाती है। फ़िल्म की कहानी में रोशन यानी सैफ एक बहुत ही महत्वकांक्षी इंसान हैं जो अपना जुनून फॉलो करना जानता है। वो अमेरिका में शेफ है मगर भारत आने पर उसे अपने बेटे के साथ ज़िन्दगी जीने का मौका मिलता है। जिस समय तक वो अपने बेटे के साथ होता है उसे लगता है उसने वो सब कुछ पा लिया। फ़िल्म की कहानी बाप बेटे के इर्द गिर्द घूमती है मगर इसमें पद्मप्रिया का भी अहम रोल है। पद्मप्रिया साउथ की मशहूर हीरोइन हैं और फ़िल्म में एक डांसर की भूमिका में हैं। फ़िल्म का सबसे अच्छा हिस्सा ये रहा कि तलाकशुदा होने के बावजूद दोनों माता पिता अपने बच्चे की परवरिश का पूरा ख्याल रखते हैं और एक बच्चे को मां के साथ-साथ पिता का भी पूरा साथ मिलता है जिससे वो सिर्फ स्काइप पर बाते कर पाता था । फ़िल्म के अंत में सैफ का डायलॉग 'काम से प्यार और प्यार से काम करने के चक्कर में प्यार तो कहीं छूट ही गया दिल को छू जाता है' ।

    सैफ पहली बार किसी टीनएज बच्चे के बाप बने हैं और वो काफी हद तक इसको निभाने में सफल भी हुए। मगर किन्हीं जगहों पर भाव उनके हाथों से फिसलते नज़र आये। सैफ की पत्नी बनी पद्मप्रिया का किरदार काफी काबिले तारीफ़ है। सैफ के बेटे बने स्वर कांबले बेहतर लगे। फ़िल्म में केरला के रिफ्रेशिंग सीन्स आपको उसकी ख़ूबसूरती से रूबरू करायेंगे । बिज्जू अंकल के रूप में मिलिंद सोमन का किरदार बहुत छोटा सा है मगर अच्छा था। कॉमिक लीजेंड रुसेल पीटर और म्यूजिशियन रघु दीक्षित का फिल्म में कैमियो रोल है।

    फ़िल्म आपको पूरा एक रोड ट्रिप कराएगी,जिसमें फन,फ़ूड और फैमिली पर फोकस रहेगा फ़िल्म में कई जगह कुछ नाटकीय टकराव हैं मगर रितेश शाह के सरस डायलॉग उसे बहुत अच्छे से पाट देते हैं । फ़िल्म काफी धीमी है और इसकी कहानी को बड़ी ही सहजता और सलीके से प्रदर्शित किया गया है।

    फ़िल्म में कोई ख़ास गाने नहीं हैं मगर फ़िल्म का गाना सुघल लगा ले आपको उत्साहित करता है वहीं दरमियां आपको खट्टी मीठी यादों से रुबरु कराएगा।

    सिनेमेटोग्राफी काफी अच्छी है फ़िल्म में आपको केरला के केरला के खूबसूरत नज़ारे और सनसेट को बहुत अच्छे से प्रदर्शित किया गया है । एक रोड ट्रिप का रास्ता और जहां से फ़ूड ट्रक गुजरता है उसे बहुत अच्छे से कवर किया गया है। इसके अलावा खाने के कई ऐसे सीन हैं जो आपके मुंह में भी पानी ला देंगे ।

    फ़िल्म कुछ हिस्सों में न्याय करती है और ये हमारी उम्मीदों पर खरा उतरी। खाने की पूरी यात्रा और उस दौरान मिली सीख सुखद रही। ये फ़िल्म आपको रिश्तों को सहेजना सीखाती है। कुलमिलाकर ये आपको निराश नहीं करेगी आप परिवार के साथ इसका आनंद उठा सकते हैं।

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  • Surabhi Shukla

    Surabhi Shukla

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