ऑल यूज़र रिवीव्स ऑफ़ नानू की जानू

  • लोगों को डराती कम और हंसाती ज़्यादा है अभय देओल की फिल्म 'नानू की जानू ' !

    Usha Shrivas (31692 डीएम पॉइंट्स)

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    देसीमार्टीनी | अपडेट - April 20, 2018 00:02 AM IST
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    निर्णय - बिना किसी लॉजिक के बनाई गई है ये फिल्म !

    नानू की जानू रिलीज़ डेट : April 20, 2018



    आपने बहुत सी भूतिया और डरावनी फ़िल्में देखी होंगी। कुछ को देख कर तो आप खूब डरे भी होंगे। लेकिन अभय देओल की फिल्म ‘नानू की जानू’ एक ऐसी फिल्म का मिश्रण है जो आपको डराएगी भी और हंसाएगी भी। इस फिल्म से लम्बे समय बाद अभय देओल ने बड़े परदे पर वापसी की है। फिल्म में उनके साथ पत्रलेखा, हिमानी शिवपुरी, बृजेन्द्र, काला, मनु ऋषि जैसे कलाकार हैं। फिल्म 2014 में आई तमिल फिल्म 'पिसासु' का हिंदी रीमेक है, जिसे ‘वॉर छोडो न यार’ जैसी फिल्म डायरेक्ट कर चुके फराज हैदर ने डायरेक्ट किया है।

    फिल्म आनंद उर्फ़ नानू नाम के ऐसे लड़के के इर्द-गिर्द घूमती है, जो जबरन लोगों का घर हडप लेता है। दोस्तों के साथ मिलकर गुंडागर्दी करना उसका पेशा है। लेकिन एक घटना से उसकी पूरी जिंदगी बदल जाती है और फिल्म और ज्यादा इंटरेस्टिंग हो जाती है। इसी घटना के दौरान उसकी मुलाकात पत्रलेखा यानी सिद्धि से होती है। जो भूत बन नानू को परेशान करती है। कहानी कुछ ऐसे ही आगे बढती है, जिसमें नानू को एक भूत यानी सिद्धि से प्यार हो जता है। और नानू की जिंदगी का मकसद उस खुनी को ढूँढना बन जाता है। जिस वजह से सिद्धि की मौत हुई होती है। अब खुनी कौन है इसके लिए आपको फिल्म देखनी होगी।
    बस यही कहानी है, जिसमें कॉमेडी का तड़का जबरदस्त तरीके से लगाया गया है। इस कॉमेडी फिल्म में अचानक से आये इस भूतिया तडके को आप खूब एन्जॉय करेंगे। फिल्म की शुरुआत में आपको सपना चौधरी का हरियाणवी डांस भी देखने को मिलेगा। जो मज़ेदार है।

    अब फिल्म की कमियों और खूबियों की बात की जाये तो इस फिल्म की सबसे बड़ी कमी यही है कि ये बिना किसी लॉजिक के बनाई गई फिल्म है। धीमी रफ़्तार है और बिना जरूरत के डाले गए सीन्स फिल्म को बोरिंग बनाते हैं। लेकिन अच्छी बात ये है कि कुछ हद तक आप कहानी से जुड़े रहते हैं और आगे की कहानी जानने के लिए उत्सुकता बनी रहती है। वैसे फिल्म में एक भूत और इंसान की लव स्टोरी दिखाई गई है, जिसे हम पहले अनुष्का शर्मा की फिल्म ‘परी’ में भी देख चुके हैं. लेकिन ये कहानी थोड़ी अलग है।

    फिल्म में एक्टर्स ने बेहतरीन काम किया है। अभय देओल के एक्टिंग टैलेंट के बारे में तो हम सभी जानते हैं, इस फिल्म में भी उनकी एक्टिंग जबरदस्त है। सपोर्टिंग कास्ट को बिल्कुल नज़रन्दाज नहीं किया जा सकता। फिर चाहे डब्बू का रोल निभाने वाले मनु ऋषि हो या माँ के रोल में हिमानी शिवपुरी। ये किरदार आपका दिल जीत लेंगे। हाँ, बस पत्रलेखा का काम उतना अच्छा नहीं था। मुश्किल से 10-12 मिनट ही स्क्रीन पर वो नज़र आई होंगी।

    फिल्म का म्यूजिक खास कर बैकग्राउंड साउंड अच्छा है। आपको डराता भी और हंसाता भी। दिल्ली-नोएडा की लोकेशन दिखाई गई है। डायरेक्शन अच्छा है लेकिन कहानी कमजोर है। अंत तो बहुत ख़राब है। ये एक बिना लॉजिक की फिल्म है लेकिन एंटरटेनिंग है। इस वीकेंड फॅमिली के साथ ये फिल्म जरुर देखी जानी चाहिए।

    • Storyline
    • Direction
    • Acting
    • Cinematography
    • Music

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  • Usha Shrivas

    Usha Shrivas

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    रेटेड 2.0अप्रैल 20, 2018

    लोगों को डराती कम और हंसाती ज़्यादा है अभय देओल की फिल्म 'नानू की जानू ' !

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