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संजू: बेहतरीन है 21 साल के संजय से लेकर 60 साल के संजू बाबा बनने की कहानी !

  • Usha Shrivas

    Usha Shrivas (268152 डीएम पॉइंट्स)

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    देसीमार्टीनी | अपडेट - जून 29, 2018 2:11 बजे IST
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    निर्णय - शानदार परफॉरमेंस और बेहतरीन डायरेक्शन का मिश्रण है फिल्म 'संजू' !

    संजूट्रेलर देखें रिलीज़ डेट : जून 29, 2018

    संजय दत्त की बायोपिक के चर्चे करीब साल भर से चल रहे थे। फिर संजय दत्त बने रणबीर कपूर की तस्वीरें, फिल्म का टीज़र, ट्रेलर वायरल होने के बाद आज फिल्म रिलीज़ हो गई। फिल्म के ट्रेलर में दिखाई गई संजय दत्त की लाइफ को देखने के लिए हर कोई सिनेमाहॉल तक जाने पर मजबूर हो जायेगा। इस फिल्म में संजू के जिंदगी के हर उस पहले पर कैमरा दौड़ाया गया, जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं। इस फिल्म में उनकी जवानी से लेकर अब तक का सफ़र शानदार तरीके से दिखाया गया है। हाँ, फिल्म के किरदारों को लेकर जो ग़लतफहमी पहले थी वो फिल्म देखने के बाद दूर हो जाएगी।

    फिल्म की शुरुआत संजू को हुई 5 साल की सजा से होती है। जहां उन्हें पत्नी मान्यता और उनके दोनों बच्चों के साथ दिखाया जाता है। तब एंट्री होती है अनुष्का शर्मा कि जो संजय दत्त की वकील नहीं बल्कि एक मशहूर लेखिका विनी का किरदार निभा रही हैं, जिन्होंने संजू पर किताब लिखी थी। संजू यानि रणबीर अपनी उस जर्नी के बारे में बताते हैं, जिसके बारे में कम ही लिखा-पढ़ा गया। माँ नरगिस का साथ छोड़ कर जाना, संजू का ड्रग्स का आदि होना, पिता सुनील दत्त का बेटे के हर बुरे वक़्त में साथ खड़े रहना। ड्रग्स की वजह से प्रेमिका रूबी(सोनम कपूर) का किसी और से शादी कर लेना। अमेरिका के रिहैब सेंटर में अपना इलाज कराना और सबसे खास कमलेश कन्हैयालाल(विकी कौशल) के रूप में एक ऐसे दोस्त का जिंदगी में आना, जो भाई से कम न था। इसके अलावा फिल्म में संजू पर लगे वो तमाम आरोप, कोर्ट-कचहरी, जेल सबको बेहतरीन तरीके से दिखाया गया।

    संजू की ज़िन्दगी के हर अहम् पहलु पर डायरेक्टर राजकुमार हिरानी ने गहराई से काम किया है। 80 के दशक का संजू हो या आज का संजू बाबा। न्यूयॉर्क की लोकेशन, मुंबई का बम ब्लास्ट। और संजू के पारिवारिक रिश्तो को ऐसे दिखाया जैसे वो खुद संजू के इस सफ़र में उनके साथ थे। ये फिल्म राजकुमार हिरानी का मास्टरपीस है। कमाल का डायरेक्शन। साथ ही फिल्म में तीन खूबसूरत गाने हैं, जो फिल्म की कहानी के साथ बिल्कुल जुड़े हैं। और आपको भी जोड़े रखेंगे।

    अगर परफॉरमेंस की बात करे तो रणबीर एक्टिंग के मामले में आज के हीरोज़ के बाप निकलेंगे। वो संजू के किरदार को घोट कर पी गए हैं। 21 साल के संजू के ड्रग्स के दिन हों या 60 साल के समझदार संजू, रणबीर ने कहीं कोई कसर नहीं छोड़ी। हाँ, सपोर्टिंग रोल में नज़र आये विकी कौशल भी रणबीर से कम नहीं थे। कुछ सीन्स में तो लगा जैसे वो रणबीर पर भी भारी पड़े हैं। इसके अलावा सुनील दत्त का किरदार परेश रावल से अच्छा कोई नहीं निभा सकता था। मनीषा, सोनम, जिम सर्भ और अनुष्का इन्होंने अपना हिस्सा बखूबी निभाया है।

    अगर फिल्म की कमियों की बात करें तो कुछ सीन्स में लगा जैसे जबरदस्ती ऑडियंस को इमोशनल करने की कोशिश की जा रही है। मीडिया के एंगल को बार-बार दिखाना। संजू बॉलीवुड स्टार हैं लेकिन पूरी फिल्म में बॉलीवुड एंगल नहीं दिखाया गया। न ही उनके अफेयर्स की बात की गई और न शादी और बेटी त्रिशाला का ज़िक्र। फिल्म देख कर लगा जैसे उनकी छवि को साफ़ करने की अच्छी कोशिश की गई है। अगर इस फिल्म को संजू की बायोपिक न कहकर सिर्फ एक बेहतरीन फिल्म कहा जाये तो गलत नहीं होगा।

    शानदार परफॉरमेंस, बेहतरीन डायरेक्शन के मिश्रण से बनी ये फिल्म बार-बार देखी जानी चाहिए।