कार्तिक आर्यन मां संग मिलकर दिवाली पर करवाते हैं घर की सफाई, बचपन की यादें ऐसे की ताजा

    कार्तिक आर्यन मां संग मिलकर दिवाली पर करवाते हैं घर की सफाई, बचपन की यादें ऐसे की ताजा

    आम घर के लड़के की तरह कार्तिक आर्यन दिवाली के खास मौके पर अपनी मां की घर साफ करने में मदद करते हैं। साथ ही बचपन में वो कैसे दिवाली मनाते थे ये चीज उन्होंने बताई है। 

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    आज पूरे देशभर में दिवाली का त्योहार बेहद ही धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। इस फेस्टिवल का आम जनता के साथ-साथ बॉलीवुड सेलेब्स भी बेसब्री के साथ इंतजार करते हैं। ऐसे में आज इंतजार की वो घड़ी खत्म हो गई है। लेकिन दिवाली मनाने से पहले घर की सफाई और बाकी चीजों को भी किया जाता है। वैसे आम जनता के साथ सेलेब्स ऐसा ही कुछ अपने घर पर दिवाली को लेकर करते हुए दिखाई देते हैं। यहां हम बात कर रहे हैं एक्टर कार्तिक आर्यन की। वो भी जब शूटिंग नहीं कर रहे होते हैं तो दिवाली के मौके पर घर की सफाई करते हैं। एक्टर ने खुद ये बात अपनी बचपन की बातों को ताजा करते हुए कही है। 

    एक्टर कार्तिक आर्यन ने एक इंटरव्यू में अपनी बात रखते हुए कहा, 'एक अभिनेता होने के नाते मेरे घर में त्योहारों को मनाने का तरीका नहीं बदला है, क्योंकि एक्टिंग सिर्फ मेरा काम है. घर में मैं पहले बेटा हूं। अगर मैं घर पर हूं और शूटिंग नहीं कर रहा हूं, तो मेरी मां यह सुनिश्चित करती हैं कि मैं दिवाली पर घर की सफाई में मदद करूं और मैं इसे बिना किसी शिकायत के खुशी-खुशी करता हूं। वास्तव में, यह मजेदार होता है जब परिवार में हर कोई एक ही काम कर रहा होता है और चारों ओर हलचल होती है। दिवाली पर घर का मिनी मेकओवर होता है. ये छोटी चीजें हैं जो वास्तव में सबसे मजेदार हैं. इस साल, मैं एक के बाद एक शहजादा और फ्रेडी की शूटिंग में व्यस्त था, इसलिए मैं सफाई की रस्म में भाग नहीं ले सका।'

    सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक कार्तिक अबकि बार अपनी फैमली के साथ दिवाली मनाने वाले हैं। उन्होंने इसके अलावा बताया कि दिवाली के खास मौके पर वो क्या-क्या करते हैं। अपनी बचपन की यादें ताजा करते हुए एक्टर ने बताया, ‘मुझे याद है बचपन में, मैं पूरे साल दिवाली का इंतज़ार करता था क्योंकि इस त्योहर पर नए कपड़े बनते जाते थे। दिवाली के शाम शुद्ध घर में भाग भागकर दिए जलाते हम लोग। मेरी बहन और मेरे बीच प्रतियोगिता होती थी की कौन ज्यादा दिया जलेगा, किसके पास ज्यादा पताके हैं। ये भी एक मुंडा होता था. बचपन की दिवाली का अलग ही मजा था।’

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