लैला मजनू रिव्यू: इमोशन्स और बहुत सारे प्यार से भरी लैला मजनू की कहानी आपके दिल में घर कर लेगी !

मूवी: लैला मजनू

रेटेड : 3.0/5.0

कास्ट : अविनाश तिवारी, तृप्ति डिमरी

डायरेक्टर : साजिद अली

निर्णय: लैला मजनू में तृप्ति और अविनाश का बढ़िया अभिनय इस फिल्म की खासियत है !

कहते हैं जोड़ियां आसमानों में बनती हैं? लेकिन क्या सच में ऐसा होता है? क्या सही में इन्सान का किसी से मिलना और उसके प्यार में पड़ना तकदीर में लिखा होता है? शायद हां, शायद नहीं !

आज के प्रैक्टिकल ज़माने में जहां या तो सच्ची प्रेम कहानियां होती नहीं हैं या फिर समय के साथ इन्सान का दूसरे के प्रति प्यार हार मान लेता है। इम्तियाज़ अली लेकर आये हैं लैला और मजनू की अमर कहानी, जो आप को उस प्यार के बारे में बताएगी जो इस दुनिया में होकर भी दुनिया से परे है। दो प्रेमी, एक लैला और एक मजनू। दोनों एक दूसरे के प्यार में पागल, तकदीर के मिलाये हुए, एक होकर भी जुदा और जुदा होकर भी साथ थे, वो थे लैला और मजनू !

लैला मजनू रिव्यू: इमोशन्स और बहुत सारे प्यार से भरी लैला मजनू की कहानी आपके दिल में घर कर लेगी !

लैला मजनू की कहानी तो सबको पता है। हालाँकि ये कहानी है कश्मीर की चुलबुली लड़की लैला और एक बिगड़ैल लड़के क़ैस की। तकदीर के मिलाये ये दो लोग एक दूसरे को शुरुआत में पसंद करते हैं और ये पसंद कब जुनूनी प्यार बन जाती है पता ही नहीं चलता। इन दोनों के परिवार प्रॉपर्टी को लेकर एक दूसरे से दुश्मनी मोल लिए हुए हैं, जिसका मलतब है कि लैला और क़ैस का एक होना नामुमकिन है। लेकिन वो कहते हैं ना तकदीर के मिलाये लोगों को इंसान दूर नहीं कर सकता। और जब रिश्ता जिस्म नहीं बल्कि रूह से हो तो बन्दे को हर चीज़ में अपना प्यार दिखता है।

तृप्ति डिमरी और अविनाश तिवारी ने इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभायी है और इसी फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू किया है। ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि इन दोनों का डेब्यू सफल रहा। जहां तृप्ति ने चुलबुली और प्यारी लैला का किरदार बखूबी निभाया है वहीं क़ैस के किरदार में अविनाश ने मेरा दिल जीत लिया। फिल्म के ट्रेलर से ही साफ़ था कि अविनाश का काम अच्छा होगा और वे दर्शकों की उम्मीद पर खरे उतरे हैं। एक बिगड़ैल लड़का जो एक मासूम सी लड़की के प्यार में पड़ा और फिर उसके लिए पागल ही हो गया। लैला ही उनकी ज़िन्दगी और लैला ही उसकी मौत। जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है अविनाश तिवारी की एक्टिंग और भी ज़्यादा इंटेंस होती जाती है और वो आपके दिमाग पर काबू करने लगते हैं। अंत में जो होना होगा वो आपको हो जायेगा।

सपोर्टिंग कास्ट की बात करें तो सुमित कॉल का जवाब नहीं। लैला का कजिन इब्बन, जो उसपर नज़र रखता है और जलन से भरा हुआ गुमानी इंसान है, के किरदार में सुमित ने अच्छा काम किया है। इसके अलावा परमीत सेठी और अन्य कलाकारों ने भी अपना किरदार अच्छे से निभाया है।

इम्तियाज़ अली के भाई साजिद अली ने इस फिल्म को बनाया है और बतौर डायरेक्टर ये उनकी पहली फिल्म है। साजिद की मेहनत इस फिल्म में साफ़ दिखाई देती है कि कैसे उन्होंने इस प्रेम कहानी को एक बार फिर दोहराने और दर्शकों के दिलों तक पहुंचाने के लिए लगन से काम किया है। फिल्म की सिनेमेटोग्राफी का जवाब नहीं है क्योंकि कश्मीर की वादियाँ, पहाड़, नदियां, गली-कूचे सब अच्छे से कैमरे में कैद किये गये हैं, कैमरा वर्क बढ़िया है।

लैला मजनू रिव्यू: इमोशन्स और बहुत सारे प्यार से भरी लैला मजनू की कहानी आपके दिल में घर कर लेगी !

म्यूजिक की बात की जाए तो इस फिल्म की एल्बम मेरी फेवरेट बन चुकी है। फिल्म में 10 गाने हैं और एक भी गाना आपको बुरा या फिर अपनी जगह से अलग नहीं लगेगा। ये सभी गाने फिल्म के फील को और गहरा बनाते हैं और फिल्म में खो जाते हैं। म्यूजिक कंपोजर्स निलाद्री कुमार और जोई बरुआ का काम लाजवाब है। हितेश सोनिक का कंपोज़ किया फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर भी बढ़िया है। सिंगर आतिफ असलम का गाया ओ मेरी लैला आप एक बार तो ज़रूर गुनगुनाओगे।

मैं ये नहीं कह रही कि फिल्म में कमियां नहीं हैं लेकिन एक्टर्स की एक्टिंग और फिल्म का म्यूजिक आपको इन कमियों को इग्नोर करने को राज़ी कर देता है। अगर कुछ नहीं तो एक बार ये फिल्म ज़रूर देखी जानी चाहिए। लैला-मजनू की प्रेमी कहानी के लिए, तृप्ति और अविनाश के बच्चे काम के लिए, आतिफ असलम की आवाज़ के लिए- कारण कोई भी हो सकता है !

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