14 फेरे रिव्यू: विक्रांत और कृति की लव स्टोरी मे है टोटल स्यापा, लेकिन फिल्म देती है दमदार मैसेज

    14 फेरे रिव्यू: विक्रांत और कृति की लव स्टोरी मे है टोटल स्यापा, लेकिन फिल्म देती है दमदार मैसेज

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    14 फेरे रिव्यू: विक्रांत और कृति की लव स्टोरी मे है टोटल स्यापा
    14 फेरे रिव्यू: विक्रांत और कृति की लव स्टोरी मे है टोटल स्यापा, लेकिन फिल्म देती है दमदार मैसेज
    Updated : July 23, 2021 03:18 PM IST

    शादी लाइफ का एक बहुत बड़ा फैसला होता है। कहा जाता है कि शादी सिर्फ लड़के और लड़की के बीच नहीं बल्कि दो परिवारों के बीच होती है। ऐसे में लड़के और लड़की का दिल मिल जाए और परिवार को दिल न मिले तो क्या किया जाए? इस सवाल का एक जवाब देती है फिल्म 14 फेरे।

    इस फिल्म में संजय (विक्रांत मेसी) नाम का लड़का है जिसे कॉलेज में अपनी सीनियर अदिति (कृति खरबंदा) से प्यार हो जाता है। कॉलेज खत्म होने तक दोनों शादी का फैसला भी कर लेते हैं लेकिन बीच में आ जाता है परिवार जिन्हें दूसरी जाति में शादी करने से बहुत दिक्कत है। संजय के परिवार से तो पहले ही एक बहन घर से भागकर शादी कर लेती है। ऐसे में संजय के लिए देहात में रह रहे अपने परिवार को मनाना लगभग नामुमकिन हो जाता है और अदिति के पिता को तो लव मैरिज से ही नफरत है। ऐसे में दोनों प्लान बनाने हैं नकली पैरेंट्स (जमील खान और गौहर खान) लाने का। ये नकली पैरेंट्स ही एक बार संजय के माता पिता बनकर अदिती के पैरेंट्स बनते हैं और दूसरी बार अदिती के पैरेंट्स बनकर संजय के पैरेंट्स बनते हैं। यहीं से शुरू होता है सारा स्यापा।

    आगे की पूरी फिल्म इसी स्यापे और कॉमेडी से भरपूर है। फिल्म की कहानी तो आपको साफ समझ आती रहेगी, बहुत ससपेंस नहीं है लेकिन डायरेक्टर देवांशू कुमार ने इसको दर्शकों के सामने ऐसे परोसा गया है कि कोई भी इस फिल्म को देखते हुए इधर उधर जाने के बारे में सोचेगा भी नहीं। लगातार आप इस फिल्म से पूरे समय जुड़े रहेंगे। फिल्म का टाइटल 14 फेरे क्यों रखा गया है, ये आपको फिल्म देखकर बड़े आराम से समझ आ जाएगा।

    ऐसा नहीं है कि आप सिर्फ 14 फेरे देखेंगे और हंसते हुए उठकर चले जाएंगे। फिल्म में कई मुद्दे और बातें दिखाई गई हैं, जिनसे लगता है कि समाज इतना मॉर्डन होने के बाद भी कैसे पीछे रह जाता है या कैसे समाज की सोच आज भी पहले की तरह ही बनी हुई है। फिल्म में एक सबसे बड़ी बात जेनरेशन गैप, जातिवाद, दहेज प्रथा जैसी चीजें दिखाई गई हैं। चलिए देहात या छोटे शहरों के इलाकों में तो आज भी लड़कियों के लिए बंदिशें है लेकिन बड़े शहरों और बड़े परिवार में भी कैसे लड़कियों को देश के अंदर ही एक शहर से दूसरे शहर पढ़ने के लिए नहीं भेजा जाता है, ये भी दिखाया गया है।

    लेकिन साथ ही इन परेशानियों और दिक्कत से कैसे आज की जेनरेशन लड़ रही है वो भी शामिल है। भले ही आज के जेनरेशन अलग रहना चाहती है लेकिन परिवार की अहमियत और और एहसास भी दिखाया गया है। संजय और अदिती चाहते तो भागकर यूएस में सेटल हो सकते थे लेकिन फिर अड़ियल परिवार के रवैये को भी झेलते हुए कैसे दोनों अपने अपने परिवार को तवज्जों देते हैं, ये बहुत ही खूबसूरती से दिखाया गया है। फिल्म में न सिर्फ विक्रांत मेसी और कृति खरबंदा ने बेहतरीन काम किया है बल्कि हर एक सपोर्टिंग कास्ट ने अपना किरदार काफी बेहतरीन तरीके से निभाया है। गौहर खान जिस तरह से मां बनी हैं, उनसे इस रोल की किसी को उम्मीद न होगी लेकिन उन्होंने इस रोल में जो धमाका मचाया है वो तो जरूर देखना बनता है।

    आप कह सकते हैं कि फिल्म में इतनी सारी चीजें अच्छी हैं तो खामिया भी तो होंगी। फिल्म के एक्जीक्यूशन में कोई दिक्कत नजर नहीं आती है लेकिन हां फिल्म के गाने और ब्रैकग्राउंड म्यूजिक थोड़ा काम तालमेल खाता नजर आता है। बाकी एक सिंपल कहानी और बिना कुछ कॉप्लीकेट किए कैसे बेहतर तरीके से मैसेज पहुंचाया जा सकता है, वो इस फिल्म में दिखता है। फिल्म को आप जरूर देख सकते हैं और दूसरों को भी रीकमेंड कर सकते हैं।

    Updated: July 23, 2021 03:18 PM IST
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    बॉलीवुड गपशप का बिंदास बंदा। मूवी और वेब सीरीज में खास दिलचस्पी। राइटिंग और वीडियो इंटरव्यू से देता हूं एंटरटेनमेंट का डोज।