'बंटी और बबली 2' रिव्यू: सैफ़-रानी का जलवा और पुरानी रेसिपी का हलवा; नई जोड़ी के साथ पंकज त्रिपाठी भी हैं मज़ेदार!

    'बंटी और बबली 2' रिव्यू: सैफ़-रानी का जलवा और पुरानी रेसिपी का हलवा; नई जोड़ी के साथ पंकज त्रिपाठी भी हैं मज़ेदार!

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    'बंटी और बबली 2' रिव्यू: सैफ़-रानी का जलवा और पुरानी रेसिपी का हलवा
    'बंटी और बबली 2' रिव्यू: सैफ़-रानी का जलवा और पुरानी रेसिपी का हलवा; नई जोड़ी के साथ पंकज त्रिपाठी भी हैं मज़ेदार!
    Updated : November 19, 2021 10:46 PM IST

    ये जो वर्ल्ड है न वर्ल्ड, इसमें दो तरीके के लोग होते हैं। पहले जो किसी फिल्म के नाम के आगे 'रिटर्न्स' 'अगेन' 'दोबारा' या '2' लगा हुआ देखकर, मतलब सीक्वल सुनकर ही निराश-हताश हो जाते हैं। और दूसरे वो, जो पहले वाली से वफादारी निभाने के लिए सीक्वल देख डालते हैं, और फिर हताश होते हैं। अगर आप दूसरे वाले हैं, तो 'बंटी और बबली 2' देखी जा सकती है।

    लेकिन अगर आप पहले वाले हैं… रिस्क है! लेकिन ये जो वर्ल्ड है न वर्ल्ड, यहां हर दो टाइप के लोग एक चीज़ पे राजी हो जाते हैं- पंकज त्रिपाठी। जटायु सिंह बने पंकज त्रिपाठी फ़िल्म का भौकाल टाइट रखते हैं। भौकाल से याद आया, अभिषेक बच्चन को मैं बड़ा मिस कर रहा था। 'बंटी और बबली' वो फ़िल्म है जहां से लोगों को अभिषेक में दम दिखा था। और इस टाइम अभिषेक का जैसा करियर चल रहा है 'बंटी और बबली 2' से उन्हें फिर एक जम्प-स्टार्ट भी मिल जाता।

    खैर, गाड़ी को पटरी से उतारकर खेतों में न ले जाते हुए… मुद्दा ये है कि मार्किट में नए बंटी बबली आ गए हैं (सिद्धांत चतुर्वेदी और शरवरी वाघ)। पुराने वालों के साथ (सैफ़ और रानी) एक दुर्घटना हो गई है जिसका नाम ज़िंदगी है! दोनों अब जंगली जीव से घरेलू जीव हो गए हैं, कतई पारिवारिक-सामाजिक प्राणी। लेकिन नए बंटी बबली ने पुराने वालों के नाम पर कांड खुद कर के, पोस्टर पुराने वालों के लगा दिए हैं। जटायु सिंह जब पुराने वालों को धर लेते हैं तब पता लगता है कि मामला क्या है। अब नए वाले बंटी बबली के पास लूटपाट करने के अपने कारण हैं। पुराने वालों को अपना ब्रांड बचाना है। और जटायु सिंह का भी अपना एजेंडा है, जिसमें कुरकुरे डायलॉग मारना ज़्यादा बड़ी प्रायोरिटी है!

    डायरेक्टर-राइटर वरुण वी शर्मा ने चस्के में आ के फ़िल्म लिख तो दी लेकिन पंगा ये है कि उन्होंने पुरानी वाली खोल के उसके पुर्जे नई वाली में रीसायकल नहीं किए, बल्कि फोटोकॉपी करने की कोशिश की है। यानी पिछली फिल्म का रेफरेंस ज़बरदस्ती घुसाने की कोशिश, जबकि आपकी फ़िल्म वैसी बिल्कुल नहीं है। 'बंटी और बबली' से रानी मुखर्जी की कुर्तियां एक क्रेज़ बन गई थीं, लेकिन सीक्वल में उनके फैशन सेंस को आप ट्रोल सा कर रहे हैं।

    सिद्धांत और शरवरी दोनों ने बहुत अच्छा काम किया है और नए बंटी-बबली बनकर दमदार लगे। पिछली फिल्म की तरह इस बार भी रानी ने बहुत ज़ोरदार माहौल बनाया। लेकिन सैफ के पार्ट में दिक्कत ये थी कि वो अभिषेक बच्चन को मैच करने में बहुत जोर लगा रहे थे, जो वियर्ड लग रहा था। क्योंकि वो उन्होंने खुद यूपी बेस्ड कैरेक्टर्स कई बार, और ज़ोरदार प्ले किए हैं। ऊपर से एक बहुत वियर्ड चीज़ है फ़िल्म में 7-8 साल के बच्चों को सेक्सुअलाइज़ करना। मतलब रियलिटी शोज़ कम पड़ गए क्या जो अब फिल्में भी ये करेंगी!

    हां, फ़िल्म कुछेक जगह पर पॉलिटिक्स पर सटायर लेती ज़रूर नज़र आई, जो अच्छा लगा। ओरिजिनल बंटी बबली ने औलाद के नाम पर जो बारूद पैदा किया है, वो भी बहुत मजेदार है। कुल जमा बात ये है कि 'बंटी और बबली 2' एक फॉर्मूला फन फ़िल्म है, जिसमें 2005 वाला कूलत्व मिसिंग है। लेकिन टीवी-शीवी पर एवरेज बॉलीवुड लविंग जनता की 'कोई फ़िल्म ही लगा लो यार' की डिमांड पूरी कर देगी। लेकिन इसके लिए पैसे और एफर्ट खर्च कर के जाना न हो पाएगा।


    Updated: November 19, 2021 10:46 PM IST
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