चेहरे रिव्यू: एकदम हटकर है अमिताभ बच्चन और इमरान हाशमी की ये थ्रिलर सस्पेंस कहानी

    चेहरे रिव्यू: एकदम हटकर है अमिताभ बच्चन और इमरान हाशमी की ये थ्रिलर सस्पेंस कहानी

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    चेहरे रिव्यू: हटकर है अमिताभ बच्चन और इमरान हाशमी की ये कहानी
    चेहरे रिव्यू: एकदम हटकर है अमिताभ बच्चन और इमरान हाशमी की ये थ्रिलर सस्पेंस कहानी
    Updated : November 11, 2021 03:12 PM IST

    अमिताभ बच्चन और इमराम हाशमी स्टारर फिल्म चेहरे आखिरकार रिलीज हो गई है। फिल्म के लिए थोड़ा लंबा इंतजार करना पड़ा लेकिन रंजीत तिवारी द्वारा लिखी ये फिल्म देखने के बाद आपको निराश नहीं होंगे। रूमी जाफरी की इस फिल्म को सस्पेंस थ्रिलर की कैटेगिरी में इंडिया की बेहतरीन फिल्मों में से एक कहा जा सकता है।

    आनंद पंडित के प्रोडक्शन में बनी चेहरे का ट्रेलर जैसा दिख रहा है कहानी वाकई में वैसी ही है। फिल्म में एक कोर्ट रूम ड्रामा दिखाया गया है जो कि एक घर में होता है। ये कहने के लिए नकली है लेकिन इसके नतीजे असली निकलते हैं। इस खेल तो कुछ रियाटर जज और वकील खलते हैं। एक एड एजेंसी के मालिक समीर मेहरा यानी इमरान हाशमी इस खेल में फंस जाते हैं। इसके बाद डिफेंस लॉयर यानी अनु कपूर इमरान की तरफ से केस लड़ते हैं और तलीफ जैदी यानी अमिताभ बच्चन इमरान के खिलाफ होते हैं। जस्टिस जसदीश आचार्य यानी धृतिमान चटर्जी आखिर में इसाफ सुनाते हैं। कहानी जितनी साफ दिख रही है, उसके उतनी ही उलट है। आखिर का अंत और फिल्म का एक एक छोटा बड़ा सस्पेंस देखने के लिए आपको फिल्म तो देखनी ही पड़ेगी।

    फिल्म की और इसके कैरेक्टर्स की खूबियों की बात करें तो सबसे पहले इसकी स्क्रिप्ट काफी अलग है। ये कहानी अपने आप में नई है और किसी और स्टोरी से मिलती जुलती बिल्कुल नजर नहीं आएगी। अमिताभ को ये स्क्रिप्ट इतनी पसंद आ गई थी कि उन्होंने इसमें फ्री में काम किया है। फर्स्ट हाफ तक फिल्म आपको जो सीट से चिपका कर रखती है, आपको पता ही नहीं चलेगा कब इंटरवल हो गया। हां इंटरवल के बाद आप अंदाजा लगाना शुरू हो जाएंगी कि अब ये होगा, लेकिन फिल्म का एंड आते आते आपके अंदाजे के साथ साथ आपको और भी काफी कुछ मिल जाता है। हर एक छोटी चीज दूसरे से रिलेट करती नजर आएगी।

    कैरेक्टर्स की बात करें तो अमिताभ बच्चन, अन्नू कपूर और रघबीर यादव जैसे उस्ताद एक्टर्स हैं जिनके रहने से ही फिल्म का लेवल बढ़ जाता है। अमिताभ बच्चन को देखकर आपको बदला और पिंक फिल्में याद आ जाएंगी। कुछ वैसे ही इंसाफ की बातें करते हुए अमिताभ आपको यहां नजर आते हैं।

    सबकी नजरें फिल्म में एक और कैरेक्टर पर टिकी रहेंगी और वो हैं रिया चक्रवर्ती। रिया चक्रवर्ती काफी अटपटी सी लगेंगी लेकिन आखिर में आपको समझ में आएगा कि वो ऐसा क्यों कर रही हैं। और यही उनकी एक्टिंग को खूबसूरत बनाता है कि वो इस कैरेक्टर को कितने आराम से करती हैं कोई एफर्ट अलग से उनके चेहरे पर नहीं दिखता। इनके अलावा पूरी फिल्म में एक और कैरेक्टर क्रिस्टल डिसूजा का है। फिल्म के आखिर में इमरान का कैरेक्टर तो नहीं दिखेगा लेकिन क्रिस्टल आखिर में भी नजर आएंगी।

    फिल्म में इतने अच्छे प्वाइंट्स होने के बाद भी फिल्म कहीं कहीं ट्रेक से अलग होती दिखती है। सस्पेंस और थ्रिलर ज्यादा करने के चक्कर में कहीं कहीं लॉजिक छूटते हुए नजर आते हैं। उदाहरण के तौर पर क्रिस्टल के फार्म हाउस में किसी नौकर चाकर या दरवाजे पर गार्ड का न होगा। इसके अलावा अमिताभ का फिल्म के आखिर में मोनोलॉग है जो कि उन्होंने बखूबी डिलीवर किया है जिसमें निर्भया और लक्ष्मी के एसिड विक्टिम केस की चर्चा की गई है लेकिन वो यहां इतना लंबा दिखाना संबंधित नहीं लगता। इसी तरफ फिल्म के शुरू में जब अमिताभ कविता सुनाते हैं तो आपका मन करता है कि अब तो हमें सिर्फ फिल्म देखनी है। फिल्म के हिसाब से साउंड ट्रेक और अच्छा हो सकता था।

    हालांकि अगर इन कुछ प्वाइंट्स को नजरअंदाज किया जाए तो फिल्म वाकई में काफी दिलचस्प है।

    Updated: November 11, 2021 03:12 PM IST
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    बॉलीवुड गपशप का बिंदास बंदा। मूवी और वेब सीरीज में खास दिलचस्पी। राइटिंग और वीडियो इंटरव्यू से देता हूं एंटरटेनमेंट का डोज।