मीनाक्षी सुंदरेश्वर रिव्यू: अरेंज मैरिज की दिक्कतों का ये सॉल्यूशन देती है सान्या मल्होत्रा और अभिमन्यू दसानी की फिल्म

    मीनाक्षी सुंदरेश्वर रिव्यू: अरेंज मैरिज की दिक्कतों का ये सॉल्यूशन देती है सान्या मल्होत्रा और अभिमन्यू दसानी की फिल्म

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    मीनाक्षी सुंदरेश्वर: अरेंज मैरिज की दिक्कतों का ये सॉल्यूशन देती है ये फिल्म
    मीनाक्षी सुंदरेश्वर रिव्यू: अरेंज मैरिज की दिक्कतों का ये सॉल्यूशन देती है सान्या मल्होत्रा और अभिमन्यू दसानी की फिल्म
    Updated : November 05, 2021 05:39 PM IST

    इस हफ्ते नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई सान्या माल्होत्रा और अभिमन्यू दसानी की फिल्म मीनाक्षी सुंदरेश्वर में अरेंज मैरिज और उसमें आने वाली दिक्कतों की पूरी दास्तान है। कैसे इत्तेफाक से ये अरेंज मैरिज होती है, लॉन्ग डिस्टेंस की अलग परेशानी, और बड़े बूढ़ों का आजकल के बच्चों को न समझ पानास, खासतौर से अपनी बहुओं को और फिर चीजें कैसे ठीक होती हैं। ये सारे मसाले हमारे साउथ के इस सांभर में देखने को मिलेगी।

    फिल्म की कहानी
    मीनाक्षी सुंदरेश्वर की कहानी बिल्कुल साफ है कि एक अरेंज मैरिज में मीनाक्षी (सान्या मल्होत्रा) की शादी सुंदरेश्वर (अभिमन्यू) से होती है। लेकिन ये इत्तेफाक होता है कि लड़के के घरवाले गलत लड़की के घर चले जाते है, फैमिली वाले लड़के लड़की को बातचीत के लिए अलग रूम में भी भेज देते हैं और बाद में पता चलता कि उन्हें किसी और घर में जाना था लेकिन मीनाक्षी के घर के मुखिया को लगता है कि ये तो भगवान की मर्जी है और वो मीनाक्षी और सुंदरेश्वर की कैमेस्ट्री देखकर समझ जाते हैं कि दोनों एक दूसरे के लिए बने हैं।

    खैर शादी होती है। सुंदेश्वर को शादी के बाद इंटर्नशिप मिल जाती है जहां उसे ये नहीं बताना होता है कि वो शादी शुदा है। इसिलए मीनाक्षी को भी अपने साथ नहीं रख सकता। यहां लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप शुरू हो जाता है और फिर आती हैं तरह तरह की दिक्कतें। मीनाक्षी का भी झुकाव शादी के बाद अपने दोस्त की तरफ दिखाया गया है। लेकिन ये क्यों हैं और इससे क्या उसकी शादी पर फर्क पड़ता है। ये सब आप फिल्म में देखेंगे।

    फिल्म में क्या अच्छा
    फिल्म को सिंपल और स्वीट वाले लिहाज से दिखाया गया है। साउथ का बैकग्राउंड है लेकिन हिंदी पट्टी के लोगों के लिए इसे अच्छे से परोसा गया है। आपको ये उसी तरह फील होगा जैसे आप दिल्ली में रहते हुए सर्वना में जाकर ढोसा खाकर आएं। अरेंज मैरिज, ज्वाइंट फैमिली, बहु की इच्छाओं प्राथमिकता न देना, बड़े गलत हैं फिर भी उनसे माफी मांगना जैसे कई मुद्दे उठाने की कोशिश की गई है। खासतौर से जब मीनाक्षी बुआ को बोलती है कि अगर टाइम से मंदिर जाने की बजाय टाइम के साथ बदल गए होते तो ठीक होता। फिल्म खत्म होते होते इन दिक्कतों का समाधान भी बताया गया है लेकिन सिचुएशन पर निर्भर करता है क्योंकि सबकी परिस्थितियां एक जैसी नहीं होती। साथ ही एक कॉमेडी का छोटा सा तड़का भी है जिसे देखकर आप हंसे बिना रह नहीं पाएंगे जिसे फिल्म के अंदर चोर पुलिस का खेल कहा गया है।

    कहां दिखती है कमी
    फिल्म आपको बांधें रखने में कामयाब नहीं होती। गानों से तो आप कोई उम्मीद मत करिएगा। एक्टिंग के लिहाज से सान्या या अभिमन्यू ने कोई आउटस्टैंडिंग परफोर्मेंस नहीं दी है। स्क्रिप्ट के हिसाब से सब नॉर्मल ही था। फिल्म की शुरुआत तो जिस हिसाब से मजेदार लगती है और लगता है कि आगे कुछ अलग निकलकर आएगा, उसकी इच्छा भी मत रखिएगा। अभिमन्यू आखिर में जब एक ऐप बनाता है तो ऐसा लगता है कि इसका डेटा कहां से आएगा क्या ये प्राइवेसी ब्रीच करनी वाली ऐप है। इमोशन्स के बीच इस फैक्ट को चुपके से साइड करने की कोशिश की गई है। डायरेक्टर विवेक सोनी से फिल्म को थोड़ा और टाइट प्रेजेंट करने की उम्मीद थी। आप घर में बैठे हैं और बोर हो रहे हैं और कोई नई फिल्म देखने का मन कर रहा है तो इस फिल्म को देख सकते हैं।


    Updated: November 05, 2021 05:39 PM IST
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    बॉलीवुड गपशप का बिंदास बंदा। मूवी और वेब सीरीज में खास दिलचस्पी। राइटिंग और वीडियो इंटरव्यू से देता हूं एंटरटेनमेंट का डोज।