Rocketry The Nambi Effect Review: आर माधवन और शाहरुख कर देंगे इमोशनल, नांबी नारायणन के लिए दिल से बजेंगी तालियां

    Rocketry The Nambi Effect Review: आर माधवन और शाहरुख कर देंगे इमोशनल, नांबी नारायणन के लिए दिल से बजेंगी तालियां

    3.5

    रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट

    रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट आर माधवन की डायरेक्शन में बनी एक साइंस फिक्शन फिल्म है। इसमें इसरो के साइंटिस्ट नांबी नारायण की कहानी दिखाई गई है कि कैसे देश के बेहतरीन वैज्ञानिक होते हुए भी उन पर देशद्रोह का आरोप लग जाता है।

    Director :
    • आर माधवन
    Cast :
    • आर माधवन,
    • शाहरुख खान,
    • रजित कपूर
    Genre :
    • साइंस फिक्शन
    Language :
    • हिंदी, तमिल, इंग्लिश
    Rocketry The Nambi Effect Review: आर माधवन और शाहरुख कर देंगे इमोशनल, नांबी नारायणन के लिए दिल से बजेंगी तालियां
    Updated : July 03, 2022 12:44 PM IST

    आर माधवन की फिल्म रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट का जितना लंबा इंतजार था, उसे उतने लंबे समय बाद देखना वाकई सुकून देता है। ये एक साइंटिफिक फिल्म है तो दर्शकों के मन में ये सवाल उठना वाजिब है कि क्या इसे आम दर्शक समझ पाएंगे या फिल्म देखना रॉकेट साइंस साबित होगा। यकीन मानिए ये फिल्म कोई रॉकेट साइंस नहीं है। आर माधवन ने इस फिल्म को जितने अच्छे से डायरेक्ट किया है, यहां उनकी डायरेक्शन की दाद देनी पड़ेगी। लेकिन क्या ये फिल्म दर्शकों के दिल में उतर पाएगी या नहीं। आइए जानते हैं इस रिव्यू में।

    फिल्म की कहानी?
    फिल्म की इसरो के साइंटिस्ट नांबी नारायण की है। ये एक सच्ची कहानी है। फिल्म नांबी नारायण पर लगे दाग से शुरू होती है और ये आपको फ्लैशबैक में ले जाती है, जहां नांबी नारायण ने विक्रम साराभाई और एपीजे अब्दुल कलाम के साथ मिलकर एक नए सफर की शुरुआत की थी। जहां इसरो में साइंटिस्ट सॉलिड इंजन पर काम कर रहे थे, वहीं नांबी स्कॉलरशिप लेकर लिक्वड पर काम करने निकल पड़ते हैं। वो अपने तीन साल के कोर्स को 10 महीने के अंदर पूरा कर दिखाते हैं। उन्हें नासा में नौकरी मिलती है। इंडिया में जहां वो पांच साल में कमाते वहीं नासा में वो एक महीने में कमा सकते थे लेकिन देशप्रेम उन्हें वापस इंडिया ले आता है। अलग अलग देशों में घूमकर नांबी स्पेस के क्षेत्र में इंडिया को दिन ब दिन आगे ले जाते हैं। वो अपनी रणनीति से दूसरे देशों से ऐसी ऐसी डील कर आते हैं जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता। लेकिन इसी बीच नांबी का बेरहम चेहरा भी दिखाया गया है। उनका पागलपन देश को दिन-रात आगे बढ़ा रहा होता है कि तभी उन पर वो आरोप लगते हैं जो उन्होंने कभी किए ही नहीं। उनकी जिंदगी बद से बदतर हो जाती है। लेकिन वो हार नहीं मानते। देर से ही सही लेकिन वो अपनी लड़ाई जीतते हैं। फिल्म के आखिर में दो चीजें होंगी। एक तो आपको पता चलेगा कि उनके साथ ऐसा किसने किया और दूसरा अंत में आपको नांबी के लिए खड़े होकर ताली बजाने का मन जरूर करेगा।

    क्या अच्छा?
    फिल्म जब अपने इंटरवल पर होती है तो आपको ऐसा सीट से जकड़कर रखेगी जैसे फेवीक्विक लगा दिया हो। सेकेंड हाफ ऐसा है कि आप इमोशनल हुए बिना नहीं रह पाएंगे। फिल्म की ज्यादातर तारीफ वैसे सेकेंड हाफ की ही करनी होगी। आर माधवन ने नांबी नारायण का जवानी से लेकर बुढ़ापे तक का जो कैरेक्टर पकड़ा है, उसमें आपको असली नांबी नारायण ही नजर आएंगे। फिल्म की स्टोरी, डायरेक्शन, स्क्रीनप्ले सब आर माधवन का है। एक्टिंग के बाद डायरेक्शन के मामले में भी आर माधवन ने अच्छे अच्छे डायरेक्टर्स को टक्कर दे दी है। फिल्म की कहानी असली है, सबके सामने है फिर भी स्पॉएलर नहीं दिए जा सकते। आप इसे थियेटर में जाकर ही देखें तो आप फिल्म को महसूस कर पाएंगे। बिना किसी तेल मसाला के ये बायोपिक बहुत ही शुद्ध तरीके से पेश की गई है। 

    आपने रिपोर्ट्स पढ़ी होंगी कि शाहरुख खान का फिल्म में कैमियो है। हां है, और बहुत बेहतरीन है। उनका रोल काफी छोटा है लेकिन फिर भी वो पूरी फिल्म में साथ रहेंगे। उनको स्क्रीन पर वापसी करते देखना, फैंस के लिए किसी सेलिब्रेशन से कम नहीं होगा। पठान से पहले शाहरुख खान ने आखिरकार सिनेमाघरों में दस्तक दे दी है। फिल्म थोड़ा स्लो पेस में शुरू होती है लेकिन इसकी जो एंडिंग हुई है वो कमाल की है। आखिर में भी आपको एक सरप्राइज मिलता है और वो आपको और इमोशनल कर देगा।

    कहां रह गई कमी?
    आप फिल्म के फर्स्ट हाफ से निराश हो सकते हैं। क्योंकि आम दर्शकों के लिए रॉकेट और साइंस की दुनिया को समझना इतना भी आसान नहीं होता है। कह सकते हैं कि पहला हाफ फिल्म की भूमिका बनाने में निकल गया है लेकिन इंटरवल से ठीक पहले का जो सीन है वो आपको जरूर हिलाकर रख देगा। दूसरा अगर आपका इंग्लिश में हाथ तंग है तो फिर फर्स्ट हाफ से आप और ज्यादा निराश हो सकते हैं। हालांकि बाकी ये फिल्म पूरी हिंदी मे ही है। उसके लिए घबराइए मत। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक स्कोर न के बराबर ही है। हो सकता है कि माधवन ने इसे ज्यादा ड्रामेटिक न करते हुए ये फैसला लिया हो। लेकिन थोड़ा ऑडियो पर काम किया जाता तो मजा और भी बेहतर हो सकता था।

    लेकिन कुल मिलाकर आपको ये फिल्म एक बार तो जरूर देखनी चाहिए। हमारे देश में ऐसे भी वैज्ञानिक हैं जिन्होंने देश के लिए गौरवान्वित करने वाला काम किया और फिर उनके साथ ऐसा सलूक। इस फिल्म को देखने के बाद हो सकता है कि आपको नांबी के बारे में पढ़ने की और इच्छा जाग जाए। हम इस फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार देते हैं।

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    बॉलीवुड गपशप का बिंदास बंदा। मूवी और वेब सीरीज में खास दिलचस्पी। राइटिंग और वीडियो इंटरव्यू से देता हूं एंटरटेनमेंट का डोज।