सत्यमेव जयते 2 रिव्यू: जॉन अब्राहम की इस फिल्म में एक्शन और धमाका नहीं सिर्फ कान फाड़ू शोर है

    सत्यमेव जयते 2 रिव्यू: जॉन अब्राहम की इस फिल्म में एक्शन और धमाका नहीं सिर्फ कान फाड़ू शोर है

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    सत्यमेव जयते 2 रिव्यू: जॉन की इस फिल्म में एक्शन नहीं सिर्फ कान फाड़ू शोर है
    सत्यमेव जयते 2 रिव्यू: जॉन अब्राहम की इस फिल्म में एक्शन और धमाका नहीं सिर्फ कान फाड़ू शोर है
    Updated : November 25, 2021 08:19 PM IST

    जॉन अब्राहम और दिव्या खोसला कुमार की फिल्म सत्यमेव जयते 2 पिछले काफी समय से थियेटर की राह निहार रही थी। आखिरकार अब जब ये फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई है तो निराशा हाथ लगी है। जितना एक्शन और धमाका ट्रेलर में आपको दिख रहा था वो सब थियेटर में सिर्फ शोर और उलूल जुलूल की मारधाड़ ही लगती है। इसमें कोई शक नहीं कि जॉन के डोले और एब्स देखकर मजा नहीं आएगा या दिव्या बेबी डॉल खूबसूरत नजर नहीं आएंगी, लेकिन कहानी और उसका एग्जीक्यूशन नाम की भी कोई चीज होती है, और आजकल तो कंटेंट किंग कहा जाने लगा है, वो एक्सपीरीयंस आपको बिल्कुल नहीं मिलता।

    बात सबसे पहले कहानी की। सत्यमेव जयते 2 कहानी है दादा साहेब नाम के एक किसान की जो देश से भ्रष्टाचार मिटाना चाहता है और लोकपाल बिल के लिए अनशन भी करता है। लेकिन वो देश को सवांर पाता कि उससे पहले ही उसे स्वर्ग पहुंचा दिया जाता है। पत्नी कोमा में चली जाती है और पीछे रह जाते हैं तो जुड़वा बच्चे- सत्या और जय। इनमें से एक पुलिस वाला बनता है और दूसरा पॉलिटिशियन। 25 साल बाद भी सही रास्ते से भ्रष्टाचार मिटाने का रास्ता इन भाइयों को नहीं मिलता। तो इनमें से एक निकल पड़ता है अपना रास्ता अपनाकर भ्रष्टाचारियों को खत्म करने। लेकिन इसमें भी एक ट्विस्ट है जो आप मूवी देखने के बाद समझ पाएंगे। इसके अलावा एक ट्विस्ट दादा साहेब की मौत के पीछे भी है। कहानी बस भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को मारने के इर्द गिर्द ही घूमती है।

    इसके अलावा कैसे सरकारी सिस्टम काम नहीं करता। उसकी वजह से मौतें होती हैं, घटिया खाना खिलाने से बच्चों की मौतें और भी तरह के अपने महान देश के कारनामे इस फिल्म में दिखाए गए हैं।

    सत्यमेव जयते 2 देखकर आप पहली वाली सत्यमेव जयते की कहानी से ज्यादा रिलेट नहीं करें तो अच्छा होगा। क्योंकि पिछली फिल्म का इससे कोई लेना देना नहीं है, लेकिन हां फिल्म का प्लॉट कुछ कुछ वहां से उठाया गया है। फिल्म का फर्स्ट हाफ तो ऐसा कि आपको उठकर जाने का मन करेगा। दूसरे हाफ से कुछ ट्विस्ट शुरू होते हैं। जॉन ने हमेशा की तरह अपने एक्शन को दिखाया है। दिव्या की एक्टिंग की जगह आप सिर्फ उन्हें देखेंगे न कि उनकी एक्टिंग को। फिल्म में बहुत ज्यादा बैक ग्राउंड म्यूजिक आपका सिर दर्द करने के लिए काफी है। इसके अलावा लय में बोले गए डायलॉग्स आपको इरीटेट कर देंगे। गानों के नाम पर जस मानक का लहंगा गाना ही फिल्म के मूड को थोड़ा सा बचाता है या फिर नोरा फतेही का कुसु कुसु वाला बेली डांस।

    लॉजिक्स तो इस फिल्म में काफी दूर है। डायरेक्टर मिलन मिलाप जावेरी ने फोर्स वाले जॉन अब्राहम को यहां एक लेवल और अप दिखाया है और फिल्म में सबसे आखिरी एक्शन सीन देखकर तो आप चकरा ही जाएंगे। अक्षय कुमार जहां हेलीकॉप्टर पर लटक जाते हैं और उड़ते हुए चले जाते हैं, लेकिन जॉन बंधू यहां क्या करते हैं वो अगर फिल्म देखें तो ये लास्ट का सीन जरूर देखना। फिल्मों में एक्शन की खींचने की हद पता चल जाएगी। वैसे तो फिल्म देखने की सलाह नहीं रहेगी फिर भी अगर आप जॉन की वजह से ये फिल्म देखना चाहें तो देख सकते हैं। इस फिल्म को हमारी तरफ से 5 से 1.5 स्टार।