अनपॉज्ड रिव्यू: एंथलॉजी की पांचवी कहानी में नागराज मंजुले की परफॉरमेंस आत्मा चीर देती है

    अनपॉज्ड रिव्यू: एंथलॉजी की पांचवी कहानी में नागराज मंजुले की परफॉरमेंस आत्मा चीर देती है

    3.5

    फिल्म का नाम- अनपॉज्ड (एंथोलॉजी)

    भाषा-हिंदी 

    डायरेक्टर-रुचिर अरुण, नूपुर अस्थाना, अयप्पा केएम, नागराज मंजुले, शिखा माकन

    कास्ट-साकिब सलीम, आशीष वर्मा, सैम मोहन, श्रेया धनवंतरी प्रियांशु पेन्युली, राजेंद्रन, अक्षवीर सिंह सरन, नीना कुलकर्णी, गीतांजलि कुलकर्णी, रसिका अगाशे, पूर्णानंद वांदेकर, शरवरी देशपांडे नागराज मंजुले, अर्जुन करचेंड, हनुमंत भंडारी

    कोरोना महामारी के दौरान उपजी असल कहानियों को पांच हिस्सों में पेश किया गया है! ये पांचों कहानी निराशा में उम्मीद और सकरात्मक उर्जा पैदा करती हैं !

    अनपॉज्ड रिव्यू: एंथलॉजी की पांचवी कहानी में नागराज मंजुले की परफॉरमेंस आत्मा चीर देती है
    Updated : January 21, 2022 03:56 PM IST

    कुछ समय पहले अमेज़न प्राइम वीडियो के नए शो ‘अनपॉज्ड’ का ट्रेलर सामने आया था। इस ट्रेलर में कोरोना महामारी के बीच फंसी लोगों की जिंदगी को दिखाया गया था। ट्रेलर देख कर तो लगा कि कैसे कोई भी फिल्म या एंथोलॉजी इतनी बड़ी घटना को कुछ घंटों या मिनटों में निपटा सकती है। लेकिन पांच अनोखी कहानियों से बनी ये एंथोलॉजी आपको इस निराशाजनक समय में कुछ पल तसल्ली के दे देगी।

    कोरोना महामारी से जूझ रही दुनिया में सिर्फ पांच ऐसी कहानियों को दिखाया गया है जिससे आप खुद को जोड़ पाते हैं। आपने अपने साथ या अपने जानने वाले के साथ इस घटना को होते हुए देखा होगा। नौकरी चली जाना, कोरोना में अपनी जान की परवा किये बिना काम में लगे फ्रस्ट्रेट लोग, घर में हुए बच्चे की एक झलक के लिए तरस जाना, पैसे की मार और अपने को खोने का डर...ये सभी कहानियां कहीं न कहीं आप से, हम से जुड़ी हुई है। यही इस एंथोलॉजी में दिखाया गया है। इस एंथोलॉजी की सबसे खास बात ये है कि ये आपको दुख का एहसास नहीं कराती है। बल्कि सब अच्छा होने की उम्मीद में बांध देती है। और उम्मीदें कहां बुरी होती हैं। ये तो बस तकलीफों को सहने की हिम्मत दे देती हैं। इस एंथोलॉजी में भी आपको खूब दर्द, दुख नज़र आएगा। लेकिन इसका सुखद अंत बताया है कि ये महामारी हमेशा के लिए नहीं है। सावधानी बरती जाये तो इसके साथ भी वक़्त अच्छा है।

    पांच एपिसोड की एंथोलॉजी ‘अनपॉज्ड’ में पहली कहानी ‘द कपल’ है

    द कपल को ‘नुपुर अस्थाना’ ने डायरेक्ट किया है। ये कहानी एक मीडिल क्लास के एक ऐसे कपल की है जिनकी नौकरी पेशा जिंदगी में अचानक कोरोना का तूफ़ान आ जाता है। आर्थिक स्थिति की हालत डगमगा तो जाती ही है। लेकिन इसके साथ ही निजी जिंदगी पर भी असर पड़ता है। इस कहानी में आपको डिजिटल दुनिया के दो बड़े चेहरे स्कैम 1992 की श्रेया धनवंतरी और ‘मिर्जापुर 2’ एंथोलॉजी से प्रियांशु पेन्युली लीड में दिखे हैं। इस कहानी का एनी सुखद था।

    वॉर रूम

    इस एंथोलॉजी की दूसरी कहानी ‘वॉर रूम’ नाम से ही समझ आ गया है कि कहानी क्या होगी। इस कहानी को अयप्पा केएम ने डायरेक्ट किया है। एंथोलॉजी का ये हिस्सा फ्रंटलाइन वारियर्स की असल मेहनत और महामारी के दौरान उनकी खुद की निजी जिंदगी में मचे तूफान के बारे में बताती है। एक बेबस माँ इस कहानी की जान है। यह एक दिलचस्प हिस्सा है जो दबाव में मानवीय भावनाओं के एक अलग पहलू को उजागर करती है। इस कहानी की असली हीरो गीतांजलि कुलकर्णी हैं।

    तीन तिगाड़ा

    तीन तिगाड़ा के मज़ेदार कहानी है। इसका डायरेक्शन रुचिर अरुण ने किया है। कहानी में साकिब सलीम, आशीष वर्मा और सैम मोहन लीड में हैं। इस कहानी में लॉकडाउन में बने दुश्मन और दोस्ती पर है। ये कहानी गरीब-अमीर से ज्यादा इंसानी भावनाओं, रिश्ते को महत्व देती है। इस तीन की तिकड़ी ने शानदार काम किया है।

    गोंद के लड्डू

    गोंद के लड्डू के हल्की लेकिन मज़ेदार कहानी है। इसका डायरेक्शन शिखा माकन ने किया है। कोरोना के ऐसे वक़्त से पर्दा उठाती हैं जहां दूरी तो आ गई है लेकिन रिश्ते मजबूत हो गये हैं। दूर बैठे-बैठे एक माँ कैसे अपनी बेटी और नातिन तक पहुंचती है, यही खासियत है इस प्यारी सी कहानी की। गोंद के लड्डू में दर्शन राजेंद्रन, अक्षवीर सिंह सरन और नीना कुलकर्णी ने अहम भूमिका निभाई है।

    वैकुंठ

    वैकुंठ के ऐसी कहानी जो दिल चीर देती है। इस कहानी में एक्टिंग के साथ डायरेक्शन भी नागराज मंजुले ने किया है। ये इस एंथोलॉजी की सबसे दमदार और असलियत दिखाने वाली कहानी है। कोरोना के दौरान हो रही मौतों को इंसानियत के नाते आग के हवाले करने वाले का जब खुद का नुकसान होने लगता है तब आपका मन रो पड़ता है। इस कहानी का हर एक सीन ऐसा है जैसे आप कहानी, उस दर्द का हिस्सा हो। ये कहानी निराशा की ओर ले जाती है। नदी में बहती लाशे, शमशान घाट में आती लाशों के ढेर आपके मन में अपनों के लिए डर पैदा कर देते हैं। लेकिन इस कहानी का अंत उतना ही खूबसूरत है जैसे मुरझाने के बाद फूल फिर खिल उठता है। निराशा में आशा पैदा करती है ये कहानी।

    मैंने शुरुआत में कहा था ये एंथलॉजी आपको कुछ अच्छा होने की उम्मीद देती है। मेरी तरफ से 5 में से 3.5 स्टार्स। कोरोना काल में आपको कुछ अच्छा महसूस करना है तो ये एंथलॉजी देख डालिए।