सूर्यवंशी रिव्यू: अक्षय कुमार, रोहित शेट्टी का ये एक्शन धमाका बॉक्स-आफिस पर दिवाली की गारंटी है

    सूर्यवंशी रिव्यू: अक्षय कुमार, रोहित शेट्टी का ये एक्शन धमाका बॉक्स-आफिस पर दिवाली की गारंटी है

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    सूर्यवंशी रिव्यू: अक्षय कुमार, रोहित शेट्टी का ये एक्शन धमाका बॉक्स...
    सूर्यवंशी रिव्यू: अक्षय कुमार, रोहित शेट्टी का ये एक्शन धमाका बॉक्स-आफिस पर दिवाली की गारंटी है
    Updated : November 05, 2021 07:24 PM IST

    एक लाइन में कहा जाए तो रोहित शेट्टी ने आज थिएटर्स में नोट छापने की मशीन लगाई है। अक्षय कुमार स्टारर 'सूर्यवंशी' न सिर्फ 'सिंघम' और 'सिम्बा' वाले कॉप-ड्रामा को आगे बढ़ाती है, बल्कि रोहित शेट्टी के कॉप-यूनिवर्स को और बड़ा भी करती है। कोरोना शुरू होने के बाद से जनता को तरसते थिएटर्स के बॉक्स-ऑफिस, 'सूर्यवंशी' नाम की इस नोटों की मशीन से फिर हरे-भरे होने वाले हैं। लेकिन इस मशीन के नट-बोल्ट ज़रा से ढीले हैं।

    कहानी सिंपल है- वीर सूर्यवंशी (अक्षय कुमार) मुम्बई पुलिस के ए टी एस (Anti Terrorism Squad) के दमदार पुलिस ऑफिसर हैं। मुम्बई पर एक बड़े आतंकी हमले का खतरा है। वीर के अपने परिवार और लव स्टोरी का भी कॉकटेल भी साथ में है, जहां कैटरीना कैफ हैं। और स्नैक्स में आतंकवाद के धार्मिक एंगल पर एक रनिंग कमेंट्री भी है। साथ में चाट मसाले के तौर पर हल्का कॉमिक पुट है।

    लेकिन एक प्रॉपर 'मील' परोसने के चक्कर में जो अलग-अलग डिशेज़ यानी सब-प्लॉट्स हैं, उनका मज़ा हल्का हो जाता है। जैसे सिंघम और सिम्बा के पर्सनल कनफ्लिक्ट से आप जितना फ़िल्म में इन्वेस्ट हुए थे, उतना ज्यादा सूर्यवंशी के कनफ्लिक्ट में नहीं हो पाते।

    टेररिज़्म की जिस समस्या से देश 70 साल से नहीं निपट पा रहा, उसका सॉल्यूशन मसाला फिल्म्स जिस तरह 70 मिनट में करने लगी हैं, वो अब बहुत चलताऊ और बोरिंग भी लगने लगा है। हालांकि, देश में धार्मिक एकता को बढ़ाने का मैसेज फ़िल्म में बार-बार रिपीट किया गया है। लेकिन इसे जितना ठूंस-ठूंस के सूर्यवंशी के खोल में भरने की कोशिश हुई है, उससे कहानी की सिलाई खुल गयी है।

    मगर 'सूर्यवंशी' में मास मोमेंट्स की भरमार है। कोरोना और लॉकडाउन के बाद पहली बार भर-भर के थिएटर पहुंचने वाले दर्शकों के लिए भरपूर मसाला है। देसी स्टाइल से भरा बैकग्राउंड म्यूजिक हो या कॉमेडी के लिए डबल मीनिंग डायलॉग, या फिर अक्षय के खतरनाक स्टंट, सबकुछ ट्रेडमार्क 'मास एंटरटेनमेंट' है। ऊपर से रणवीर सिंह और अजय देवगन के ज़ोरदार कैमियो फ़िल्म का लेवल और उठा देते हैं। असल में फ़िल्म के सबसे ज़बरदस्त मोमेंट्स ही रणवीर के आने के बाद शुरू होते हैं। अक्षय काफी समय बाद ज़ोरदार एक्शन अवतार में लौटे हैं और टॉप फॉर्म में हैं। उनके जोक्स लिखे भले हल्के गए हों, मगर उनकी कॉमिक टाइमिंग अच्छी है। कैटरीना के बस कुछेक सीन हैं, मगर एक सीन में उनकी एक्टिंग में दम दिखता है। लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि 'सूर्यवंशी' देखने वाली जनता उन्हें 'टिप टिप बरसा पानी' गाने के लिए याद रखेगी!

    कुल मिलाकर 'सूर्यवंशी' एक टिपिकल मास एंटरटेनर है जिसमें एक्शन-ड्रामा-कॉमेडी का जोरदार कॉम्बो है। गंभीर किस्म के सिनेमा फैन्स को फ़िल्म कम पसंद आएगी। लेकिन त्योहार के सीजन में सेलिब्रेशन वाला मूड लेकर थिएटर में घुसे दर्शक काफी खुश होकर बाहर निकलेंगे।