'स्त्री' फिल्म रिव्यू: नए भारत की इस चुड़ैल की कहानी जितना हंसाती है, उतना ही डराती भी है !

मूवी: स्त्री

रेटेड : 4.0/5.0

कास्ट : श्रद्धा कपूर , Rajkummar Rao, Pankaj Tripathi, vsdv

डायरेक्टर : Amar Kaushik

पिछले कई सालों से हॉरर फिल्में बनाने में नाकाम बॉलीवुड ने आसान रास्ता चुना और हॉरर कॉमेडी बनानी शुरू कर दीं। मगर हिट हॉरर कॉमेडी फिल्म के नाम पर हमारे पास सिर्फ ‘गोलमाल अगेन’ है, जिसके हिट होने का कारण सिर्फ़ बड़े नाम थे। लेकिन आखिरकार राजकुमार राव और श्रद्धा कपूर की फ़िल्म ‘स्त्री’ एक ऐसी फिल्म बनकर आई है, जिसमें हॉरर भी भरपूर है और कॉमेडी भी। ‘स्त्री’ में राजकुमार राव एकदम अलग लेवल पर हैं, और इस फ़िल्म के डायलॉग बेहतरीन फ्रेशनेस के साथ आए हैं। सबसे बड़ी बात, ‘स्त्री’ की कॉमेडी कहानी की सिचुएशन से निकलकर आती है और उसके लिए व्हाट्सएप्प जोक्स का सहारा नहीं लिया गया है। 

'स्त्री' फिल्म रिव्यू: नए भारत की इस चुड़ैल की कहानी जितना हंसाती है, उतना ही डराती भी है !

फ़िल्म की कहानी शुरू होती है मध्यप्रदेश के शहर चंदेरी में, जहां विक्की यानी राजकुमार राव एक टेलर हैं। चंदेरी में हर साल 4 दिन की एक विशेष पूजा होती है। इस पूजा के वक़्त यहां एक चुड़ैल ‘स्त्री’ का खौफ रहता है, जो मर्दों को उनके नाम से पुकारती है और फिर उन्हें गायब कर ले जाती है। गायब हुए मर्दों के सिर्फ कपड़े मिलते हैं। ‘स्त्री’ से बचने का उपाय यही है कि आप अपने घर के बाहर एक खास स्याही से लिखवा लें- ‘ओ स्त्री कल आना’। अपने शहर के मॉडर्न लौंडे विक्की को ये बातें बेवकूफ़ाना लगती हैं। विक्की के पास एक दिन घाघरा सिलवाने पहुंचती हैं श्रद्धा कपूर, जिनका फ़िल्म में कोई नाम नहीं है।

श्रद्धा हर साल पूजा के वक़्त ही चंदेरी आती हैं और उसके बाद वापिस लौट जाती हैं। विक्की को श्रद्धा से प्यार होने लगता है, लेकिन श्रद्धा का बर्ताव कुछ अजीब है। जैसे कि वो विक्की को अपना नाम नहीं बताती, ना उसके पास फोन है और हमेशा सुनसान में ही मिलती है। विक्की के दोस्त उसे ये बातें नोटिस करवाते हैं मगर विक्की तो प्रेम-पुजारी बना हुआ है।

'स्त्री' फिल्म रिव्यू: नए भारत की इस चुड़ैल की कहानी जितना हंसाती है, उतना ही डराती भी है !

एक रात श्रद्धा, विक्की को मिलने सुनसान जगह बुलाती है और उससे छिपकली की पूंछ, सफेद बिल्ली की पूंछ का बाल, ब्रांडी और मटन लेकर आने को कहती है। श्रद्धा के मंगाए इस सामान सके विक्की के दोस्तों को शक होता है और वो अपने पागल दोस्त को बचाने निकल पड़ते हैं। उधर मुलाकात के लिए पहुंचा विक्की, श्रद्धा के साथ रोमांटिक होने लगता है। और इस बीच अचानक श्रद्धा सुनसान जंगल मे उसे छोड़कर गायब हो जाती है।

'स्त्री' फिल्म रिव्यू: नए भारत की इस चुड़ैल की कहानी जितना हंसाती है, उतना ही डराती भी है !

विक्की को खोजने में नाकाम उसके दोस्त वापिस घर लौटते हैं मगर उनमें से एक को, जिसका नाम जना (अभिषेक बैनर्जी) है, स्त्री उठा ले जाती है। विक्की वापिस लौट आता है और उसे जना की खबर मिलती है। अब विक्की और उसका दूसरा दोस्त यानी अपारशक्ति खुराना जना को खोजने निकलते है और पुस्तक भंडार चलाने वाले रुद्र भैया (पंकज त्रिपाठी) की मदद लेते हैं। इन तीनों के सामने अब 3 बड़े सवाल हैं-

क्या श्रद्धा कपूर ही चुड़ैल ‘स्त्री’ है ?

‘स्त्री’ जिन्हें गायब करती है वो जाते कहाँ हैं यानी जना कहाँ है ?

‘स्त्री’ से हमेशा के लिए पीछा कैसे छुड़ाया जाए ? यही इस फ़िल्म की कहानी है।

‘स्त्री’ की सबसे बड़ी खासियत है इसकी कहानी, जो अपने-आप में एक कॉमिक-अंडरटोन लिए हुए है। सुमित अरोड़ा के डायलॉग बहुत बेहतरीन हैं। फ़िल्म के डायलॉग्स में हिंदी का भरपूर इस्तेमाल है और मध्यप्रदेश वाला फील भरपूर है। फ़िल्म में, मौजूदा पॉलिटिक्स और समाज पर भयंकर व्यंग्य हैं। कॉमेडी और हॉरर के साथ-साथ फ़िल्म में कई जगह बहुत महत्वपूर्ण मैसेज भी हैं, जो आपको खटाक से आकर दिल में लगते हैं।

'स्त्री' फिल्म रिव्यू: नए भारत की इस चुड़ैल की कहानी जितना हंसाती है, उतना ही डराती भी है !

डायरेक्टर के तौर पर ‘स्त्री’ अमर कौशिक की पहली फ़िल्म है और उन्होंने ही ये फ़िल्म लिखी भी है, मगर उन्होंने फिल्म को इतना बेहतरीन संभाला है, जैसे वो फ़िल्म डायरेक्शन के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। अमर असिस्टेन्ट और एसोसिएट डायरेक्टर के तौर पर ‘आमिर’, ‘गो गोवा गॉन’, ‘फुकरे’ और ‘नो वन किल्ड जेसिका’ जैसी बेहतरीन फिल्मों पर काम कर चुके हैं। उनका ये अनुभव ‘स्त्री’ की किसी हुई स्क्रिप्ट और डायरेक्शन पर साफ दिखता है। ‘स्त्री’ की सबसे बड़ी खासियत इसका हॉरर है। बेहतरीन कॉमेडी की ही तरह, ये फ़िल्म डराती भी भयंकर है।

एक्टिंग परफॉरमेंस के स्टार पर ‘स्त्री’ शानदार फ़िल्म है। राजकुमार राव का है पहला, पूरी तरह कॉमिक किरदार कहा जा सकता है। ‘बरेली केव बर्फी’ में उनका स्वैग, कॉमेडी से ज़्यादा था। लेकिन इस फ़िल्म में राजकुमार ने भरपूर कॉमेडी की है और बेहद सहज नज़र आए। श्रद्धा कपूर से लोगों को खराब एक्टिंग का डर था, लेकिन वो अपने किरदार में ठीक रहीं। फ़िल्म की सपोर्टिंग कास्ट में अपारशक्ति खुराना, पंकज कपूर और अभिषेक बैनर्जी, बेहतरीन एक्टर्स हैं। पंकज त्रिपाठी जितनी बार स्क्रीन पर आते हैं , आपको हंसाकर जाते हैं। अपारशक्ति खुराना को स्पेशल मेंशन करना बहुत ज़रूरी है, उनकी परफॉरमेंस बहुत ज़बरदस्त रही।

'स्त्री' फिल्म रिव्यू: नए भारत की इस चुड़ैल की कहानी जितना हंसाती है, उतना ही डराती भी है !

फ़िल्म का बैकग्राउंड स्कोर बहुत दमदार है और एक भूतिया सस्पेंस वाले माहौल को अच्छे से सेट करता है। म्यूजिक की बात करें तो फ़िल्म के अंदर ‘कमरिया’ और ‘नज़र ना लग जाए’, दो ही गाने हैं और वो सही जगह इस्तेमाल किए गए हैं।

फ़िल्म का एकमात्र कमज़ोर पक्ष इसकी एंडिंग है। पिछले कुछ वक्त में आई फिल्मों की तरह ‘स्त्री’ की एंडिंग भी दर्शकों को किसी उलझन में फंसा हुआ छोड़ देती है। यहीं पर दर्शकों का मज़ा थोड़ा किरकिरा होता है। कुल मिलाकर ‘स्त्री’ बहुत दमदार फ़िल्म है और इसके टिकट पर पैसे खर्चने पर आपको भरपूर आनंद मिलेगा।

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